wankel engine क्या है ? जाने हिंदी में

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में । आज हम जानेंगे की wankel engine क्या है । और ये कैसे कार्य करता है । तो चलिए जानते हैं कि wankel इंजन क्या है

wankel engine

परम्परागत इन्टर्नल इंजन में बहुत अधिक संख्या में एक दूसरे भागों को आपस में जोड़ा जाता था  । इससे इंजन का ताप अधिक बढ़ता है । और साथ ही इसका भार भी अधिक होता है ।

इंजन को स्वयं चलने के लिए अधिक ऊर्जा व्यय करनी पड़ती है । इसके सुधार के लिए वैज्ञानिकों  ने बहुत सारे प्रयास किये जिसके फलस्वरूप एक जर्मन वैज्ञानिक फ्लेक्स वेन्कल ने सन 1954एक नए प्रकार के इंजन का अविष्कार किया ।

जिसे हम वैंकेल इंजन के नाम से जानते हैं । इस इंजन में रोटर स्थित बॉडी घूमती थी । जिसके कारण कम्प्रेशन गैस लीक हो जाती थी । समय के साथ साथ कई वैज्ञानिकों ने इसमें कई सारे सुधार किये

जिनमें फैरैडो नामक एक वैज्ञानिक ने इसे वेन्कल इंजन का स्वरुप दिया । वर्तमान समय में कई सारे देशों में इस इंजन का सफलतापूर्वक प्रयोग कारों में किया जाता है । 

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wenkel engine kaise kaam karta hai ?

वेन्कल इंजन  भी फोर स्ट्रोक के समान कार्य करता है । पर इसमें और इंजनों के समान पिस्टन , क्रैंक शाफ़्ट और कनेक्टिंग रॉड का प्रयोग नहीं किया जाता है ।

बल्कि इसमें एक त्रिभुज के आकर का एक एक वृताकार रोटर का प्रयोग किया जाता है । ये रोटर के अंडाकार चेम्बर में घूमता है । इस रोटर के बाहरी और आंतरिक तरफ गियर लगे होते हैं ।

  रोटर में तीन लोब चेम्बर होते हैं । जो चेम्बर की दीवार से मिलकर चलते हैं । चेम्बर के बाहर कलिंग चेम्बर बने होते हैं । इस वाटर कूलिंग से इंजन को ठंडा किया जाता है ।

चेम्बर में रोटर और दीवारों के बीच तीन स्थान बने होते हैं । और इन्ही स्थानों पर ही सक्शन , कम्प्रेशन , पावर , एग्जॉस्ट क्रियाएं संपन्न होती है चलिए इनको थोड़ा और जानते हैं 

 

सक्शन – सक्शन स्ट्रोक के समय रोटर घडी के समान घूमता है । जब रोटर की लोब इनलेट पोर्ट के पास पहुंचती है । तो इनलेट पोर्ट खुल जाता है । और उस जगह आंशिक शून्य  उत्पन्न होता है । और उसे पूरा करने के लिए कारबुरेटर के माध्यम से उसमें फ्यूल का मिश्रण आ जाता है । 

कम्प्रेशन – रोटर के और अधिक घूमने से इनलेट पोर्ट बंद हो जाता है । और रोटर के माध्यम से मिश्रण अगले स्थान पर दब जाता है । जिससे कम्प्रेशन स्ट्रोक पूरा हो जाता है । 

पावर – दबे मिश्रण में स्पार्क प्लग द्वारा स्पार्क दिया जाता है । जिससे मिश्रण जल जाता है । और गैसें फ़ैल जाती हैं । गैसों के फैलने के कारण रोटर को एक धक्का लगता है । और पावर जेनेरेट होती है । 

एग्जॉस्ट – रोटर को पावर मिलने से वो घूमने लगता है । जिसके साथ ही एग्जॉस्ट पोर्ट खुल जाता है । रोटर के धक्के से जली हुई गैसें चेम्बर से बाहर निकल जाती हैं । इसी प्रकार रोटर घूमता रहता है । और इंजन चलता रहता है । 

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wankel engine के लाभ

  • वैंकेल इंजन में काम भाग होने के कारण इसका भार काफी कम होता है । 
  • इस इंजन को कम स्थान में लगाया जा सकता है । 
  • वैंकेल इंजन की  मेंटिनेंस में भी कम खर्च आता है ।
  • इस इंजन में कम्पन्न का शोर कम होता है ।

wankel engine की कमियां

  • इस प्रकार के इंजन में फ्यूल की खपत अधिक होती है 
  • वैंकेल इंजन में फ्यूल बर्बाद अधिक होता है 
  • इसमें अधिक धुआं होता है । और इसका मुख्य कारण होता है । फ्यूल का ठीक प्रकार से न जलना 
  • ये इंजन एयर टाइट नहीं होते हैं 

आपने अभी जाना कि वैंकेल इंजन क्या होता है । और कैसे कार्य करता है । आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें और तथाऔरों के साथ भी साझा करेंऔर हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

धन्यवाद 

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