हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम क्या है ?और कैसे कार्य करता है

hydraulic break

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में  आज हम जानेंगे कि हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम क्या है । और ये कैसे कार्य करता है । तो चलिए देर न करते हुए जानते हैं कि हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम क्या है । और ये कैसे कार्य करता है

हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम

हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम में चलते पहियों को रोकने ये धीमे करने के लिए हाइड्रोलिक प्रेशर पावर का उपयोग किया जाता है । और इसके लिए इसमें ब्रेक फ्लूइड का प्रयोग किया जाता है ।

ये पास्कल नियम के अनुसार कार्य करता है । जिसके अनुसार तरल पदार्थ प्रेश करने से दबते नहीं है । और उनका दबाव चारों और एक समान रहता है । इसमें एक सिलिंडर का प्रयोग किया जाता है ।

और पिस्टन फिट किया जाता है । सिलिंडर में ब्रेक आयल भरा जाता है । जब दबाव सिलिंडर पर पड़ता है । तो तो आगे इसका दबाव समान होता है । यही सिद्धांत हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम में प्रयोग किया जाता है ।

पर अगर इस सिस्टम में किसी भी प्रकार से हवा का प्रवेश होता है और जब ब्रेक पैडल दबाने पर पाइप में आयी हवा दब जाती है जिससे ब्रेक फ्लूइड द्वारा हाइड्रोलिक प्रेशर नहीं बनता है ।  तो ब्रेक सिस्टम सही तरीके से कार्य नहीं करता है काम ही नहीं करता तो इस अवस्था में आयी हुई हवा को निकलना आवश्यक हो जाता है ।

ब्रेक सिस्टम क्या है कैसे कार्य करता है और इसके प्रकार

हाइड्रोलिक ब्रेक कैसे कार्य करता है

हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम में  मास्टर सिलिंडर का प्रयोग किया जाता है । जिसमें ब्रेक फ्लूइड भरा रहता हैor उस मास्टर सिलिंडर का कनेक्शन पुश रॉड के जरिये ब्रेक पैडल से जुड़ा रहता है ।

जब भी ब्रेक पैडल दबाया जाता है ।us अवस्था में मास्टर सिलिंडर ब्रेक ऑयल  दबाव के कारण पाइप लाइनों में होकर व्हील सिलिंडर के बीच में पहुँचता है । और जो ब्रेक ऑयल दबाव के कारण व्हील सिलिंडर में आता है ।

वो व्हील सिलिंडर में लगे पिस्टनों को बाहर की ओर फैलाता है । जिसके कारण पिस्टनों के नजदीक लगे ब्रेक शू भी फैलते है ओर ब्रेक ड्रम को घूमने से रोकते हैं ।

ब्रेक ड्रम एक्सल पर लगे होते हैं और जब ब्रेक ड्रम रुकते हैं तो एक्सल भी रूक जाते हैं और मोटर गाडी भी रूक जाती है इसके विपरीत जब ब्रेक पैडल से दबाव हटता है तब ब्रेक शू रिटर्न स्प्रिंग, ब्रेक शू और व्हील सिलिंडर के पिस्टनों को पहले जैसे स्थिति में वापस आती है ।

और व्हील सिलिंडर में आया ब्रेक ऑयल वापस मास्टर सिलिंडर में जाता है और वाहन पुनः चलने लगता है ।

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चलिए जानते हैं हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम के मुख्य भाग क्या होते हैं

मास्टर  सिलिंडर

मास्टर सिलिंडर हाइड्रोलिक ब्रेक सिस्टम में मुख्य भूमिका अदा करता है ये एक छोटा सा टैंक होता है । जिसमें हाइड्रोलिक ऑयल भरा रहता है । जो पाइपों  के माधयम से व्हील सिलिंडरों से तक जाता है । मास्टर सिलिंडर पुश रॉड के जरिये ब्रेक पैदल से जुड़ा रहता है ।

ये प्रायः तीन प्रकार के होते हैं

सिम्पल मास्टर सिलिंडर

सेण्टर वाल्व मास्टर सिलिंडर

टेंडम मास्टर सिलिंडर

चलिए इनको थोड़ा और विस्तार से जानते हैं

सिम्पल मास्टर सिलिंडर

सिम्पल मास्टर सिलिंडर  जिसमें ऊपर के हिस्से मैं ब्रेक ऑयल  के लिए एक रिजर्वायर टैंक बना होता है । और रिजर्वायर टैंक से ब्रेक ऑयल को मास्टर सिलिंडर तक जाने के लिए प्रायः दो मार्ग बने होते हैं ।

एक होता है बाई पास और कम्पैनसेट और मास्टर सिलिंडर से आगे की ओर एक एण्ड प्लग लगाया जाता है । ओर उसमें बेंजो बोल्ट ओर यूनियन लगा होता है । ओर यही से ब्रेक ऑयल दबाव के कारण सभी व्हील सिलिंडरों तक जाता है ।

सेण्टर वाल्व मास्टर सिलिंडर

सेण्टर वाल्व मास्टर सिलिंडर  में मास्टर सिलिंडर में पिस्टन के अगले हिस्से पर चैक वाल्व लगाया जाता है । ओर साथ ही कुछ मास्टर सिलिंडरों में ब्रेक ऑयल का रिजर्वायर इसी के साथ ही बना होता है ।

जब भी ब्रेक पैडल दबाया जाता है उस अवस्था में पिस्टन आगे होकर वाल्व सप्लाई को लाइन को बंद कर देता है । ओर पिस्टन के अगले हिस्से से होते हुए ऑयल दबाव के कारण व्हील सिलिंडरों में पहुँच जाता है ।

ओर इसके विपरीत जब पैडल से दवाव हट जाता है। तो ऑयल वापस चेक वाल्व के हटने के कारण वापस आ जाता है ।

टेंडम मास्टर सिलिंडर

टेंडम मास्टर सिलिंडर में प्रायः एक पिस्टन के स्थान पर दो पिस्टनों का प्रयोग किया जाता है । ओर दो आउटलेट पोर्ट बनाये जाते हैं । एक पोर्ट से आगे के ब्रेकों  को ऑयल पहुँचाया जाता है ।

ओर दूसरे पोर्ट से पिछले ब्रेकों को पहुँचाया जाता है । ओर साथ ही इसमें अंदर की ओर दो प्राइमरी ओर दो पिस्टन स्प्रिंग प्रयोग होती हैं ओर साथ ही आउटलेट पोर्ट में अलग अलग चेक वाल्व प्रयोग किये जाते हैं ।

ब्रेक शू लाइनिंग

वास्तव में ब्रेक लगाने की प्रक्रिया ब्रेक शू के द्वारा होती है । ब्रेक शू शू लाइनिंग आमतौर पर एसबस्टास पदार्थ के बनाये जाते हैं । और  ब्रेक शू पर रिविट के माध्यम से जोड़ी जाती है ।

जब भी ब्रेक का प्रयोग किया जाता है  तो समय के साथ ये लाइनिंग घिस जाती है । जिससे ब्रेक ड्रम के रगड़ने का खतरा होता है । इसलिए ब्रेक लाइनिंग के घिसने पर ब्रेक शू को बदला जाता पर कुछ छोटे वाहनों में कुछ हद तक पुराणी ब्रेक लाइनिंग को बदलकर नयी ब्रेक लाइनिंग का प्रयोग किया जाता है ।

व्हील सिलिंडर

व्हील सिलिंडर प्रायः एक छोटा सा सिलिंडर होता है । जो दोनों ब्रेक शू के बीच में फिट रहता है । और दोनों और से खुला होता है ।

इसमें मुख्यतः भाग सिलिंडर , पिस्टन , स्प्रिंग , रबर कप और ब्लीडिंग वाल्व होते हैं । इसमें व्हील सिलिंडर के दोनों और पिस्टन लगे होते हैं  और इनके साथ एक एक रबर कप फिट किये जाते हैं । रबर कप के के बीच मैं स्प्रिंग लगी होती है ।

व्हील सिलिंडर प्रायः एक एंकर प्लेट से जुड़ा होता है इसमें दो पोर्ट बने होते हैं जिनमे से मास्टर सिलिंडर का पाइप व्हील स्किलंदर से जुड़ा होता है और व्हील सिलिंडर पर एयर ब्लीडिंग पाइप भी जुड़ा होता है । साथ ही व्हील सिलिंडर के दोनों सिरों पर डस्ट बूट लगाए जाते हैं जिससे कि धूल न जा सके

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