सस्पेंशन सिस्टम क्या है ? कैसे काम करता है

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट मैं क्या आप सभी जानते हो सस्पेंशन सिस्टम क्या है? अगर नहीं तो कोई बात नहीं हम आप को बताएँगे की सस्पेंशन सिस्टम क्या है और ये गाडी के लिए क्यों जरूरी है तो चलिए शुरू करते है

 

सस्पेंशन सिस्टम क्या है ?

दोस्तों आपको पता होना चाहिए कि मोटर गाडी को रोड पर चलने के लिए बहुत दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है ।और सस्पेंशन सिस्टम मोटर गाडी को चलाने मैं महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है क्यूंकि मोटर गाडी को कई प्रकार कि सड़कों से चलना पड़ता है जैसे कच्ची पक्की ऊँची नीची और कई प्रकार के रास्तों से चलना पड़ता है । जिससे कि गाडी के पहिये जब ख़राब जगहों से गुजरते है तो गाडी में  झटके लगना स्वाभाविक है। इसके अतिरिक्त जब गाडी मैं ब्रेक लगते है ।

 

और जब गाडी को मोड़ते है तो गाडी मैं झटकों का लगना स्वाभिक है। और इस कारण गाडी मैं बैठे यात्रियों को तथा सामन को क्षति होने कि आशंका रहती है तो इस स्तिथि से बचने के लिए मोटर गाड़ियों मैं सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। जिससे कि यात्रियों को और सामान को सुरक्षित किया जाए इसी लिए मोटर गाडी मैं फ्रेम या चेसिस बॉडी और एक्सल के बीच मैं स्प्रिंग फिट किये जाते हैं। दूसरी स्तिथि मैं देखा जाये तो गाडी के एक्सल स्प्रिंग  के जरिये फ्रेम या बॉडी से जोड़े जाते है। ये स्प्रिंग निम्न प्रकार के होते है तो चलिए जानते है

स्प्रिंग के प्रकार

  1. लीफ स्प्रिंग –
  2. कोइल स्प्रिंग इनकी बनावट प्रायः कोयल नुमा होती है और इनका उपयोग प्रायः हलके मोटर वाहनों मैं किया जाता है
  3. टेपर लीफ स्प्रिंग
  4. टॉरशन बार स्प्रिंग

सस्पेंशन सिस्टम

सस्पेंशन सिस्टम के महत्वपूर्ण कार्य

  • गाडी के चलते समय स्थिरता देना
  • गाडी में बैठे यात्रियों तथा अन्य सामान को झटकों से बचाना
  • गाडी के फ्रेम को झटकों से बचाना
  • गाडी को चलाते समय, ब्रेक लगते समय या मोड़ते समय सड़क पर पहियों की पकड़ रखना
  • गाडी की बॉडी को एक सीध में रखना

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सस्पेंशन सिस्टम को प्रायः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है 

  • फ्रंट सस्पेंशन सिस्टम
  • रियर सस्पेंशन सिस्टम
  1. फ्रंट सस्पेंशन सिस्टम –  जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है की इस प्रकार का सस्पेंशन सिस्टम गाडी के अगले पहियों से सम्बंधित है आप सभी भली भाँती जानते है कि गाडी कि अगले पहियों को जरूरत पड़ने पर स्टीरिंग से मोड़ना भी होता है तो रियर सस्पेंशन सिस्टम कि अपेक्षा ये जटिल होता है

इसके  भी प्रायः दो प्रकार होते है

  1. फ्रंट सस्पेंशन सिस्टम डेड एक्सल– इस प्रकार के सस्पेंशन का उपयोग वर्तमान समय से पूर्व किया जाता रहा है । इस प्रणाली में दो लम्बी लीफ स्प्रिंग या ट्रांसवर्स स्प्रिंग के साथ दो शाक आब्जर्बरों का  प्रयोग किया जाता है लीफ स्प्रिंग स्टील की  चपटी प्लेटों से बनी होती हैं। और परतदार एक के ऊपर एक रहती हैं जिनकी संख्या लगभग 6- 8 तक होती हैं। इनमे एक मुख्य स्प्रिंग होती है जिसके दोनों सिरों पर आई होल बने होते हैं।  इन स्प्रिंगों को एक सेण्टर बोल्ट द्वारा आपस में जोड़ा जाता है। मुख्य स्प्रिंग के दोनों आई होल को शकल पिन द्वारा चेसिस के साथ जोड़ा जाता है .और ये  U बोल्टों के द्वारा एक्सल के साथ स्प्रिंग पेड से  जुड़े रहते हैं

इस  प्रकार के लीफ स्प्रिंग सीधे न होकर थोड़ा घुमावदार होते हैं इन्हे रोड स्प्रिंग भी कहते है ये निम्नलिखित प्रकार के होते है

  1. ट्रांस्वर्स रोड स्प्रिंग
  2. सेमी एलिप्ट रोड स्प्रिंग
  3. थ्री क्वार्टर एलिप्ट रोड स्प्रिंग इस 
  4. क्वार्टर एलिप्ट रोड स्प्रिंग

रियर सस्पेंशन सिस्टम – एक मोटर गाडी को सड़क पर चलने के लिए बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । कभी सड़क के गड्ढों और कभी ऊँची नीची जगहों से गुजरना पड़ता है। जिसके लिए गाडी में  फ्रंट सस्पेंशन सिस्टम के साथ साथ रियर सस्पेंशन का प्रयोग भी किया जाता है । जिसमें फ्रंट सस्पेंशन की अपेछा थोड़ा ये तीन प्रकार का होता है

  1. ट्रांसवर्स लीफ स्प्रिंग
  2. कोइल स्प्रिंग रियर सस्पेंशन
  3. लीफ स्प्रिंग रियर सस्पेंशन

 

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  • इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम –   इस प्रणाली में लीफ स्प्रिंग बीच में एक्सल के साथ बंधे रहते है। जबकि उसके दोनों सिरे चेसिस के साथ बंधे रहते हैं। जब                                                           गाडी का एक पहिया उभार या किसी पत्थर पर चढ़ जाए तो वो एक्सल दूसरे साइड को झुका देता है। जिससे सारी गाडी                                                              एक ओर झुक जाती है। हालाँकि लीफ स्प्रिंग उसे ज्यादा झुकने नहीं देती फिर भी कुछ हद तक झुक ही जाती है । जैसे                                                                कि गाडी मैं बैठे समय जब रफ़्तार तेज होती है। ओर गाडी को मोड़ते है या पहिये किसी टीले नुमा संरचना से गुजरते है।                                                              उस समय आप सभी महसूस किया होगा गाडी एक ओर हल्की झुक सी जाती है | इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए                                                                  गाड़ियों मैं प्रायः इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है इंडिपेंडेंट                                                              जिसका मतलब जिस पर कोई दबाव नहीं इंडिपेंडेंट सस्पेंशन में एक पहिये के उठने से दूसरे पहिये पर दबाव और  कोई                                                           असर नहीं पड़ता है।ओर गाडी की  बॉडी पर भी इसका कोई असर नहीं होता है इसके परिणाम गाडी लेबल पर रहती है |

 

इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार 

  1.   वर्टिकल स्लाइड विधि –      इस सिस्टम मैं  स्टब एक्सल के साथ लम्बा सा सिंपडल लगाया जाता है। सिंपडल फ्रंट एक्सल के साथ लगे बुशों के अंदर ऊपर                                                    नीचे जा सकता है। ये सिंपडल फ्रंट एक्सल के लिए सिम्प्लेड के ऊपर कॉलर लगी रहती है। जो कि स्टीयरिंग बाईरोड से जुड़ा                                                      रहता है। इसके चलने से पहिये घूम पाते है। सिंपडल के ऊपर वाले भाग में और  एक्सल के ऊपर  कुंडली कमानी लगी रहती है।                                                जो कि शॉक यानी झटकों को जज करती है ।यह सिस्टम कारों से आना शुरू हुआ है।

 

 डिवाइडिंग  एक्सल  विधि –              इस प्रकार कि विधि का उपयोग अधिकतर गाडी के पिछले एक्सल मैं किया जाता है। जिसमे डिफरेंशियल  बॉक्स चेसिस                                                                         के साथ फिक्स किया जाता है। और एक्सल शाफ़्ट तथा यूनिवर्सल जॉइंट द्वारा पहियों को ड्राइव दी जाती है। और एक्सल शाफ़्ट                                                               ट्यूब के बाहर  स्प्रिंग होते हैं  डिफरेंशियल से पहियों तक पावर पहुंचाने के लिए एक्सल पर यूनिवर्सल जॉइंट का उपयोग                                                                          किया जाता है |

 

3 . स्विंगिंग आर्म विधि –               इस प्रकार की विधि मैं स्विंगिंग आर्म के एक हिस्से पर स्टव एक्सल जोड़कर पहिये फिट किये जाते हैं। और दूसरे हिस्से पर                                                                     टॉर्जन बार के साथ जुड़ा रहता है । कई गाड़ियों मैं सिद्धांत पर रिअर सस्पेंशन लगा रहता है। इनमे स्प्रिंग के स्थान पर टॉर्जन बार                                                              लगी रहती है |

4    रबर  स्प्रिंग सस्पेंशन –          यह सिस्टम विदेशों मैं बहुत प्रचलित है। ये कम जगह घेरता है। और वजन मैं हल्का होता है। इसमें किसी प्रकार की नॉइस नहीं                                                                 होती इस सिस्टम में दो लोहे की पत्तियों के बीच में खोखले रबर के बेंज वॉक नाइएज किये जाते हैं। ऊपर वाली डिस्क ऊपर वाले                                                             आर्म से बंधी होती है। और नीचे वाली डिस्क नीचे आर्म से बंधी होती है।

इंडेपेंड सस्पेंशन सिस्टम के कुछ निम्लिखित लाभ

  1. सस्पेंशन बहुत लचीला होता है
  2. गाडी पलटने से बचती है
  3. फ्रंट  व्हील की स्प्रिंग दुरी होने पर स्टीयरिंग मैं सुविख्या होती है
  4. इंजन के लिए प्रयाप्त स्पेस रहता है

 

तो दोस्तों कैसी लगी जानकारी आप को अगर अच्छा लगा तो औरों के साथ भी शेयर करें और अपने सुझाव कमेंट बॉक्स मैं भेजें पोस्ट पढ़ने के लिए शुक्रिया |

 

 

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