रेडियेटर क्या है ? और कैसे कार्य करता है । प्रकार

रेडियेटर क्या है

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे कि एक मोटर गाडी में रेडियेटर क्या होता है । और कैसे कार्य करता है । तो चलिए जानते हैं रेडियेटर के बारे में

रेडियेटर क्या है

रेडियेटर क्या है जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि कूलिंग सिस्टम इंजन का बहुत महत्वपूर्ण भाग है । और रेडियेटर इसी कूलिंग सिस्टम का एक महत्वपूर्ण भाग है । आपने  देखा होगा कि इंजन के ठीक सामने जालीनुमा बॉक्स लगा होता है । वही रेडियेटर होता है । रेडियेटर का तात्पर्य होता है । गर्मी को बिखेरने वाला रेडियेटर का हीट एक्सचेंजर होता है । रेडियेटर का प्रयोग इंजन को ठंडा करने के लिए किया जाता है । इसमें वाटर या कूलेंट का प्रयोग किया जाता है

वाटर कूलिंग सिस्टम क्या है ? और कितने प्रकार के होते हैं

Radiator कैसे काम करता है

रेडियेटर में पानी भरा रहता है । रेडियेटर में वाटर पम्प के जरिये खींचा जाता है । लोअर टैंक में ठंडा पानी रहता है । और वो पानी इंजन के वाटर जैकेटों में जाता है । और जब पानी गर्म हो जाता है । तो वही पानी वापस रेडियेटर के अपर टैंक में आ जाता है । और फिर रेडियेटर कोर में ठंडा होते हुए लोअर टैंक में जाता है । ये एक साइकिल के रूप में कार्य करता है । जो चलता रहता है ।

रेडियेटर की बनावट

रेडियेटर में में प्रायः पतली पतली नालियों का प्रयोग किया जाता है । जो ताम्बे की बनी होती हैं । इन नालियों के चरों ओर फिन्स बने होते हैं । इस प्रकार से ठंडी होने वाली सतह अधिक हो जाती है । जिसके कारण पानी जल्दी ठंडी हो जाती है । रेडियेटर में ऊपर की ओर फिलर कैप , बीच में रेडियेटर कैप ओर ओर इसके ऊपर नीचे अपर ओर लोअर टैंक होते हैं । लोअर टैंक के नीचे ड्रेन प्लग ओर इंजन के साथ जोड़ने वाले होज पाइप के लिए वयस्था रहती है ।

कूलिंग सिस्टम क्या है ? और कैसे कार्य करता है

रेडियेटर के मुख्य भाग

रेडियेटर में मुख्यतः तीन भाग होते हैं –

अपर टैंक – जैसा कि नाम से ही प्रतीत हो रहा है । यह रेडियेटर का सबसे ऊपरी भाग होता है । इसी में पानी या वर्तमान समय में कूलेंट का प्रयोग किया जाता है । जिसके लिए इसमें कैप की वयस्था रहती है । जहाँ से वाटर या कूलेंट भरा जाता है । अपर टैंक में एक पाइप लगी रहती है । जिसको एक रिजर्वायर टैंक से होता है । इसका कार्य है । रेडियेटर ओवरफ्लो होने की स्तिथि में अतरिक्त कूलेंट या पानी को रिजर्वायर में पहुँचाना इस पाइप को लीक ऑफ़ पाइप भी कहा जाता है । रेडियेटर के अपर टैंक का सम्बन्ध इंजन के वाटर आउटलेट से होज पाइप द्वारा होता है । इंजन का गर्म पानी होज पाइप के द्वारा रेडियेटर के अपर टैंक में पहुँचता है ।

लोअर टैंक – यह रेडियेटर का निचला हिस्सा होता है । ओर ये होज पाइप के माध्यम से वाटर पम्प से भी जुड़ा रहता है । और इसी भाग से ठन्डे पानी की सप्लाई इंजन के वाटर जैकेटों को वाटर पम्प के माध्यम से की जाती है । ओर इसी भाग के निचले हिस्से में टैंक में एक ड्रेन प्लग लगा होता है । जिसके द्वारा पानी या कूलेंट को बाहर निकाला जाता है ।

रेडियेटर कोर- ये प्रायः अपर टैंक ओर लोअर टैंक के मध्य में लगी होती है । रेडियेटर कोर में असंख्य पतली नालियां लगी होती है । ओर इन्हीं नलियों के ऊपर वाले हिस्से पर फिन्स लगे होते हैं । जिससे इनका कूलिंग सरफेस एरिआ बढ़ जाता है । इसी कोर ट्यूब पर हवा प्रवाहित की जाती है । जिससे इनके अंदर बहने वाला पानी ठंडा हो जाता है ।

रेडियेटर कितने प्रकार के होते हैं

रेडियेटर कोर एक मुख्य भाग है इसकी आधार पर रेडियेटर दो प्रकार के होते हैं –

ट्यूबलर रेडियेटर कोर – इस प्रकार रेडियेटर कोर में अपर और लोअर टैंक के बीच अनेकों पतली नलियां लगी इन नलियों के चारों ओर फिन्स बने होते हैं । यदि यह ट्यूब अवरुद्ध हो जाये तो उनसे पानी होना रुक जाता है

हनी कॉम्ब रेडियेटर कोर – इस प्रकार के रेडिएटर कोर में ट्यूबों के अंदर से आर पार हवा बहती है । ओर पानी उसके बाहर की ओर बहता है । ये कोर बहुत से एयर सैलों से मिलकर बना होता है । ओर देखने में मधुमक्खी के छत्ते जैसा होता है । इसलिए इसे हनी कॉम्ब कहते हैं । ओर इसे सेल्युलर टाइप कोर भी कहा जाता है । ये प्रायः ताम्बे ओर पीतल के बनाये जाते हैं । क्यूंकि इन धातुओं में जल्दी ठंडा होने के गुण होते हैं । इसके सभी जोड़ सोल्डरिंग से लगाए जाते हैं । ऐसा इसलिए कि मरम्मत करने के समय इन्हें आसानी से हटाया जा सके

तथा पानी फ्लो होने के आधार पर रेडियेटर दो प्रकार के होते हैं –

डाउन फ्लो रेडियेटर

क्रॉस फ्लो रेडियेटर

अभी आपने जाना कि रेडियेटर के बारे में आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें ओर इस पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें और

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