रियर एक्सल क्या है ?ऑटोमोबाइल में इसका उपयोग

रियर एक्सल

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे कि रियर एक्सल क्या होता है । और गाडी में इसका क्या उपयोग है। तो फटाफट जानते हैं

 

Rear एक्सल क्या हैं

आप सभी को पता होगा कि अधिक मोटर वाहनों में रियर व्हील्स या पिछले पहियों को ही इंजन से आने वाली पावर से चलाया जाता हैं । इंजन से पावर क्लच , गियर बॉक्स और प्रोपेलर शाफ़्ट से होते हुए डिफरेंशियल तक जाती हैं ।

और फिर डिफरेंशियल उस पावर को समकोण यानि 90° par रियर एक्सल में डिवाइड करता हैं। रियर एक्सल में मुख्य भाग एक्सल केसिंग होता हैं। और एक्सल शाफ़्ट तो केवल डिफरेंशियल से प्राप्त पावर को  शाफ़्ट पर लगे पहियों तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

 

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रियर एक्सल दो प्रकार के होते हैं

1 . Rear एक्सल लाइवइस प्रकार के एक्सल में पावर डिफरेंशियल के द्वारा  पिछले पहियों में पहुंचाई जाती है । और पिछले पहिये अगले पहियों को चलाते हैं। रियर लाइव एक्सल का अर्थ पावर पिछले पहियों में होती है । ये भी दो प्रकार के होते हैं

 

  • फ्लेक्सिबल एक्सल शाफ़्ट इसमें इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। जिसमें एक्सल शाफ़्ट को यूनिवर्सल जॉइंट के माध्यम से डिफरेंशियल पर जोड़ा जाता है। जिसमें डिफरेंशियल को एक स्प्रिंग के माध्यम से चेसिस से जोड़ा जाता है ।

 

  • रियर एक्सल रिजिड इस प्रकार के एक्सल का प्रयोग मोटर गाड़ियों में बहुत अधिक किया जाता है । और इसका उपयोग बहुत समय से किया जाता है । इस  सिस्टम में एक्सल शाफ़्ट के अंधरूनी हिस्से पर स्प्लाइन कट लगे होते हैं ।

और इन स्प्लाइन कट के माध्यम से एक्सल शाफ़्ट को डिफरेंशियल से जोड़ा जाता है । और इनके बाहरी सिरे पर पहिये फिट हटे हैं । और इनके ऊपर एक्सल केसिंग का प्रयोग किया जाता है। और इसी केसिंग पर डिफरेंशियल जुड़ा रहता है । जब ये एक्सल जिस केसिंग में घूमते हैं । उसी केसिंग पर गाडी का अधिक भार पड़ता है ।

एक्सल केसिंग के भी दो प्रकार होते हैं ।

1 . स्प्लिट रियर एक्सल केसिंगइस सिस्टम में एक्सल केसिंग को दो हिस्सों में डिवाइड किया जाता है । और एक्सल ट्यूब के एक हिस्से पर हब फ्लैंज बनाया जाता है । और वहीँ दूसरे हिस्से पर हाफ डिफरेंशियल हाउजिंग बनाया जाता है ।

और दोनों हाफ डिफरेंशियल हाउजिंग के मध्य में डिफरेंशियल को हाउजिंग नट बोल्टों के द्वारा आपस में जोड़ा जाता है । इस प्रकार के एक्सल केसिंग का उपयोग वर्तमान समय में नहीं किया जाता । और ये वजन में काफी भारी होते हैं ।

2 . बैंजो रियर एक्सल केसिंग

वर्तमान समय में बेंजो रियर एक्सल केसिंग का उपयोग बहुत अधिक मोटर गाड़ियों में किया जाता है । इस सिस्टम में दोनों तरफ एक्सल केसिंग ट्यूब का प्रयोग किया जाता है । और डिफरेंशियल के लिए बीच में हाउजिंग का प्रयोग किया जाता है ।

 और उस पर कवर फिट किये जाते हैं । और एक्सल ट्यूब प् रोड स्प्रिंग सिटिंग पैड के द्वारा  फिट होते हैं। तथा ट्यूब के किनारे पर स्लीव लगी होती है । और इनमें बियरिंग लगी होती है । तथा पहियों को एक्सल केसिंग में बियरिंग के माध्यम से फिट किया जाता है । ये एक्सल हब फ्लैंज से घूमते हैं । 

 

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2 . Rear एक्सल डेड इस सिस्टम में रियर एक्सल में इंजन के द्वारा कोई पावर ट्रांसमिट नहीं की जाती है । बल्कि इंजन द्वारा पावर को अगले पहियों में ट्रांसमिट किया जाता है । और अगले पहिये ही गाडी को ड्राइव देते हैं और साथ साथ पिछले पहियों को खींचते हैं ।

इस प्रकार के सिस्टम का प्रयोग जैसे मेटाडोर और वर्तमान में मारुती आदि गाड़ियों में इसका प्रयोग किया जाता है ।

 

रियर एक्सल में शाफ़्ट कैसे फिट की जाती है

रियर एक्सल में शाफ़्ट केसिंग की ट्यूब के अंदर बियरिंग की सहायता से घूमती रहती है । और पहियों को हब द्वारा घुमाती रहती है । ये तीन प्रकार से फिट की जाती है

1 . फुल फ्लोटिंग टाइप शाफ़्ट फिटिंग –

इस प्रकार की फिटिंग सबसे बेहतर रहती है । इस विधि में एक्सल शाफ़्ट के ऊपर गाडी का कोई भार नहीं रहता है । इस विधि में एक्सल शाफ़्ट के अंदर वाले भाग पर स्प्लाइन या खांचे कटे होते हैं ।

जो सन पिनियन के स्प्लाइन में फंसे होते हैं । और शाफ़्ट के बाहरी सिरे पर फ्लैंज बना होता है । ये ब्रेक ड्रम पर बने हब के बोल्ट द्वारा जुड़कर पहियों को घुमाता है । एक्सल केसिंग ट्यूब पर दो टेपर रोलर बियरिंग जुड़े होते हैं और इन्ही पर ब्रेक ड्रम घूमता है ।

 

2 . सेमी फ्लोटिंग टाइप शाफ़्ट फिटिंग –

इस प्रकार की विधि का प्रयोग बहुत समय पहले किया जाता था । इस तरह की फिटिंग में एक्सल शाफ़्ट बॉल बियरिंग की मदद से एक्सल केसिंग घूमते हैं । एक्सल शाफ़्ट का अंदर वाले भाग पर स्प्लाइन कटे होते हैं ।

डिफ्रेंशियल के सन पिनियन के साथ लॉक रहता है । एक्सल शाफ़्ट का बाहरी सिरा टेपर किया रहता है । इस पर नट लगा होता है । यही हब एक्सल केसिंग के बाहरी सिरे पर फिट होकर पहिये को घुमाता है । इस प्रकार की वयस्था में गाडी का पूरा भार एक्सल शाफ़्ट पर ही रहता है ।

 

थ्री क़्वार्टर फ्लोटिंग टाइप शाफ़्ट फिटिंग –

इस प्रकार की वयस्था का प्रयोग अब भी कुछ छोटी गाड़ियों में अब भी किया जाता है । इस तरह की शाफ़्ट फिटिंग में बियरिंग पहिये के बीच में रहता है । और एक बियरिंग को एक्सल केसिंग के ऊपर सिरे पर टेपर में भी लगाया जाता है ।

ये लगभग सेमी फ्लोटिंग के ही समान होता है।  इस वयस्था में गाडी को सीधी चाल के समय तो उसके भार को अंदर वाला बियरिंग और बाहर वाला बियरिंग सामान तरीके से वहन करते हैं ।

पर मोड़ते समय एक्सल पर अधिक भार पड़ता है । एक्सल शाफ़्ट को निकालने के लिए इसे जैक पर उठाना पड़ता है । क्यूंकि इस पर मोटर गाडी का कुछ भार रहता है । 

 

आपने जाना की रियर एक्सल क्या होता है । और ये कैसे कार्य करता है ।आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें और इस पोस्ट को औरों के साथ साझा करें और

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