बैटरी इग्निशन सिस्टम क्या है ? जाने हिंदी में

 

बैटरी इग्निशन

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में क्या आप जानते हैं । कि बैटरी इग्निशन सिस्टम क्या होता है । और ये गाड़ियों में क्या भूमिका अदा करता है । आजकल के बदलती टेक्नोलॉजी में गाड़ियों कई प्रकार की टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है ।

जिसमें कुछ इलेक्ट्रिक सम्बन्धी बदलाव होते हैं ओर इ

सके अतरिक्त वर्तमान समय मैं इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भी अधिक संख्या में प्रयोग किया जाता है । जिनमें बैटरी का प्रयोग विद्युत सुपल्ली के लिए किया जाता है ।

  इस पोस्ट में हम जानेंगे कि बैटरी इग्निशन सिस्टम क्या है । और ये किस प्रकार से कार्य करता है । तो चलिए देर न करते हुए जानते हैं कि बैटरी इग्निशन सिस्टम क्या है । और ये किस प्रकार से कार्य करता है ।

 

 

 सिस्टम क्या है ?

आप सभी अच्छे से जानते होंगे कि एक मोटर गाडी में बैटरी की भूमिका है । गाड़ी में चाहे इग्निशन सिस्टम हो या या हेड लाइट जलानी हो और हॉर्न जैसे तमाम कार्यों के लिए बैटरी का प्रयोग किया जाता है ।

पैट्रोल इंजन में ईंधन को जलाने में स्पार्क प्लग का प्रयोग किया जाता है । जिसको कि करंट बैटरी से मिलता है । एक गाडी में विद्युत का मुख्य स्रोत बैटरी है ।

गाड़ियों में अधिकतर 6V और 12V की बैटरी का प्रयोग किया जाता है ।  साथ ही बैटरी में लौ टेंशन करंट को हाई टेंशन करंट में बदलने के लिए इग्निशन कोइल का प्रयोग किया जाता है ।

और C.B पॉइंट का प्रयोग किया जाता है । इसके अतरिक्त बैटरी में बहुत से भागों का प्रयोग किया जाता है । चलिए जानते हैं । बैटरी इग्निशन सिस्टम में किन भागों का प्रयोग किया जाता है ।  

  • इग्निशन कोइल 
  • स्पार्क प्लग 
  • डिस्ट्रीब्यूटर 
  • बैटरी 
  • लौ टेंशन लीड 
  • हाई टेंशन लीड 

 

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बैटरी इग्निशन सिस्टम की बनावट और कार्य विधि

इस प्रकार के सिस्टम में बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल में अर्थ होता है । और पॉजिटिव  टर्मिनल से एक तार इग्निशन स्विच को जाता है । इग्निशन स्विच से एक तार इग्निशन कोइल के लौ टेंशन टर्मिनल से जोड़ा जाता है ।

और इसके दूसरे लौ टर्मिनल से एक तार डिस्ट्रीब्यूटर टर्मिनल द्वारा C.B पॉइंट की स्थिर आर्म से जुड़ा रहता है । जब इग्निशन स्विच को ऑन किया जाता है ।

तो बैटरी का लौ टेंशन करंट इन तारों से जा करके C.B पॉइंट के अस्थिर आर्म के मिलने पर उसके माध्यम से अर्थ होता है । और ये परिपथ जो कि प्राइमरी सर्किट कहलाता है ।

पूरा होता है । इग्निशन कोइल में दो वाइंडिंग रहती है । प्राइमरी और सेकण्डरी वाइंडिंग ये बैटरी का करंट प्राइमरी वाइंडिंग में चुंबकीय बल किरणें बनाता है ।

डिस्ट्रीब्यूटर शाफ़्ट के घूमने पर उसकी कैम द्वारा C.B पॉइंट खुल जाते हैं । इनके खुलने से प्राइमरी सर्किट टूटता है । जिससे प्राइमरी सर्किट में लगभग 250V का करंट उत्पन्न होता है ।

इस करंट के कारण सेकण्डरी वाइंडिंग में  बहुत जल्द ही 2000V का करंट बन जाता है । इस समय C.B पॉइंट को बचाने के लिए एक कन्डैन्सर का प्रयोग किया जाता है ।

2000V का हाई टेंशन करंट इग्निशन कोइल के हाई टेंशन टर्मिनल से हाई टेंशन प्लग के माध्यम से डिस्ट्रीब्यूटर के मध्य में पहुँच जाता है । ये करंट डिस्ट्रीब्यूटर में लगे रोटर को प्राप्त होता है ।

उसके पश्चात ये रोटर घूमकर डिस्ट्रीब्यूटर कैप में लगे सेगमेंटों की बारी बारी से करंट देता है । सेगमेंटों से हाई टेंशन प्लग करंट स्पार्क प्लगों को पहुंचाता है । स्पार्क प्लग इंजन के साथ अर्थ रहते हैं ।

जिसके कारण हाई टेंशन करंट का परिपथ पूरा हो जाता है । और एक चिंगारी उत्पन्न हो जाती है । यही इग्निशन सिस्टम की कार्य विधि कहलाती है । 

 

डिस्ट्रीब्यूटर क्या है ? और कैसे कार्य करता है

 

इग्निशन कोइल क्या है ?

इग्निशन कोइल की बैटरी में मुख्य भूमिका रहती है । ये बैटरी के लौ टेंशन करंट को हाई टेंशन करंट में बदलता है । इससे ही बैटरी के 6V या 12V के करंट को 2000V तक बढ़ाया जा सकता है ।

इस इग्निशन कोइल में आयरन कोर पर ताम्बे के तारों की वाइंडिंग होती है । ये वाइंडिंग दो प्रकार की होती है । प्राइमरी और सेकण्डरी वाइंडिंग प्राइमरी वाइंडिंग ताम्बे के मोठे तारों की नीचे की और उसी कोर पर रहती है ।

और इसके कम लपेट होते है । ठीक इसी के ऊपर सेकण्डरी वाइंडिंग होती है । जिसमें पतले तार के ज्यादा लपेट होते हैं । इसके साथ ही प्राइमरी वाइंडिंग को बैटरी और डिस्ट्रीब्यूटर के C.B पॉइंट से जोड़ी जाती है ।

इनके लिए इग्निशन कोइल पर दो लौ टेंशन टर्मिनल बने रहते हैं । जिसमें सेकण्डरी वाइंडिंग का एक हिस्सा प्राइमरी वाइंडिंग से जुड़ा रहता है । और दूसरा सिरा इग्निशन कोइल के हाई टेंशन टर्मिनल से जुड़ा रहता है ।

ये दोनों वाइंडिंग पर सील्ड कंटेनर में तेल में डूबी रहती है । जिससे इन्हें ठंडा रखा जाता है । कुछ कोइलों में एक ब्लास्टर रैजिस्टैंस भी प्रयोग करते हैं जो कि सेकण्डरी वाइंडिंग के हाई टेंशन करंट को नियंत्रित रखने में मदद करता है ।

इग्निशन कोइल में लौ टेंशन टर्मिनलों पर निगेटिव तथा पॉजिटिव मार्क्स बने होते है । और इसी के अनुसार डिस्ट्रीब्यूटर के तारों को जोड़ा जाता है । जिन गाड़ियों में बैटरी में नेगेटिव टर्मिनल अर्थ रहता है ।

उनमें डिस्ट्रीब्यूटर का तार कोइल के नेगेटिव से जुड़ा होता है । और जिन गाड़ियों में बैटरी का पॉजिटिव अर्थ रहता है । उनमें उनमें डिस्ट्रीब्यूटर को पॉजिटिव टर्मिनल से जोड़ा जाता है ।

इसका कारण हे कि ऐसा न करने पर कम वोल्टेज का करनी प्राप्त होता है । और कोइल की आयु भी कम हो जाती है ।

 

   

इस पोस्ट में आपने जाना कि बैटरी इग्निशन सिस्टम क्या होता है । और ये किस प्रकार से कार्य करता है । और इसकी बनावट कैसी होती है । और गाड़ियों में इसकी क्या भूमिका होती है । उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आयी हो आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें । और इस पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें और हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

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