फ्रंट एक्सल और स्टीयरिंग सिस्टम जाने हिंदी में

फ्रंट एक्सल

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और पोस्ट में आज हम जानेंगे की मोटर गाड़ी में फ्रंट एक्सल और स्टीयरिंग सिस्टम क्या कार्य करता है । और इसकी क्या उपयोगिता है तो चलिए जानते हैं।

 

फ्रंट एक्सल क्या है ?

एक मोटर गाडी में अगले पहियों को फ्रंट एक्सल के साथ जोड़ा जाता है । और स्टीयरिंग के द्वारा दोनों पहियों को आवश्यकतानुसार टर्न किया जाता है । ये  दो प्रकार के होते हैं ।

डेड फ्रंट एक्सल  क्या है ?

इस प्रकार के सिस्टम में इंजन की पावर अगले पहियों  में न होकर पिछले पहियों में होती है । और अगले पहियों में कोई पावर नहीं होती है । पिछले पहिये ही अगले पहियों को चलाते हैं । और गाडी को स्टीयरिंग की सहायता से जरूरत के अनुसार टर्न किया जाता है । ये  दो भागों में बनाया जाता है ।

  • स्टब एक्सल
  • एक्सल बीम

एक्सल बीम को बहुत मजबूत बनाया जाता है । क्यूंकि गाड़ी का वास्तविक भार बीम पर ही रहता है । यह स्टील को फोर्ज करके बनाया जाता है । और ये I सेक्शन बीम के रूप में बना होता है ।

इसी पर लीफ स्प्रिंग के आधार के लिए जगह बनी होती है । रोड स्प्रिंग को U बोल्ट के द्वारा जोड़ा जाता है । कुछ ऑटोमोबाइल में I सेक्शन बीम के स्थान पर ट्यूबलर बीम का भी प्रयोग किया जाता है । ये बीम अच्छे स्टील को प्रैस करके ट्यूब के रूप में बहुत मजबूत बनाये जाते हैं ।

 

रियर एक्सल क्या है ?ऑटोमोबाइल में इसका उपयोग

लाइव फ्रंट एक्सल

इस प्रकार के एक्सल में इंजन से आने वाली पावर को अगले यानी अगले पहियों  में ट्रांसमिट किया जाता है । और अगले पहियों के घूमने से पिछले पहिये भी घूमते हैं। अगले पहियों में पावर ट्रांसमिट के कारण इसे लाइव एक्सल कहा जाता है ।

फोर व्हील ड्राइव

बहुत सी मोटर गाड़ियों में इंजन से आने वाली पावर को फ्रंट एक्सल और रियर एक्सल में ट्रांसमिट किया जाता है । जिसमे दोनों एक्सल पर दो डिफरेंशियल लगे होते हैं । और दोनों डिफरेंशियल के लिए को प्रोपेलर शाफ़्ट का उपयोग किया जाता है ।

और पावर को चारों पहियों में ट्रांसमिट किया जाता है । जिस कारण इसे फोर व्हील ड्राइव या 4×4 कहा जाता है । क्यूंकि इस प्रणाली में पावर चारों पहियों में होती है । इससे यह लाभ है कि जब गाडी किसी दलदली जगह या कच्चे मार्ग में फंस जाती है । तो फोर व्हील ड्राइव द्वारा इसे आसानी से निकला जा सकता है । इसके लिए गाडी में गियर बॉक्स के साथ एक अलग गियर बॉक्स लगा रहता है ।

फ्रंट एक्सल के भाग

  1. स्टब एक्सल
  2. एक्सल बीम योक
  3. एक्सल बीम
  4. किंग पिन
  5. गन मेटल बुश
  6. थ्रस्ट वाशर
  7. टेपर रोलर बियरिंग

फ्रंट एक्सल प्रकार

  • लेमोइन फ्रंट एक्सल
  • इलियट फ्रंट एक्सल
  • रिवर्स इलियट फ्रंट एक्सल

डिफरेंशियल क्या है ? और ऑटोमोबाइल में इसकी उपयोगिता

स्टीयरिंग सिस्टम

ऑटोमोबाइल में अगले पहियों को आवश्यकतानुसार बिना स्लिप किये टर्न और कंट्रोल करने के लिए स्टीयरिंग का प्रयोग किया जाता है । इसे जरूरत के अनुसार दाएं और बाएं घुमाया जाता है ।

और ये स्टीयरिंग व्हील घुमाव गति को कोणीय गति में परिवर्तित करता है । जिससे अगले पहिये दाएं और बाएं गति करते हैं । और गाडी के मुड़ने का कोण व्हील की चाल पर आधारित होता है । स्टीयरिंग के कुछ भाग फ्रंट एक्सल पर जुड़े होते हैं । स्टीयरिंग सिस्टम फ्रंट एक्सल की सहायता से कार्य करता है ।

स्टीयरिंग सिस्टम के भाग

स्टीयरिंग सिस्टम कुछ बदलाव के साथ लगभग सभी गाड़ियों में सामान होता है । ये सिस्टम सेक्टर एंड वर्म टाइप होता है । इसमें निम्नलिखित भाग होते हैं ।

  1. स्टीयरिंग व्हील
  2. स्टीयरिंग कॉलम
  3. टाई रॉड
  4. कनेक्टिंग रॉड
  5. स्टीयरिंग आर्म
  6. ड्राप आर्म
  7. ड्रैग लिंक
  8. स्टीयरिंग गियर बॉक्स

स्टीयरिंग व्हील स्टीयरिंग में सबसे ऊपर लगा होता है । व्हील स्टीयरिंग शाफ़्ट पर नट द्वारा फिट रहता है । और शाफ़्ट के दूसरे सिरे पर एक वर्म बना होता है । और सेक्टर और उसकी शाफ़्ट से जुड़ा रहता है ।

और ये दोनों एक केसिंग में लगे होते हैं । जिसमें गियर आयल भरा जाता है । वहीँ सेक्टर शाफ़्ट पर लगी ड्रॉप आर्म पुश रॉड से कनेक्ट रहती है । और दराज लिंक का एक सिरा स्टीयरिंग शाफ़्ट से कनेक्ट रहता है ।

जो स्टव एक्सल के साथ कनेक्ट होता है । और स्टव एक्सल से कनेक्ट कनेक्टिंग आर्म के द्वारा दोनों पहिये रॉड के जरिये एक दूसरे से कनेक्ट रहते हैं ।

स्टीयरिंग के प्रकार कितने प्रकार के होते हैं ?

  1. वर्म एंड रोलर स्टीयरिंग
  2. रैक एंड पिनियन स्टीयरिंग
  3. हाइड्रोलिक असिस्टेड स्टीयरिंग
  4. कैम एंड रोलर स्टीयरिंग
  5. वर्म एंड व्हील स्टीयरिंग
  6. वर्म एंड सेक्टर स्टीयरिंग
  7. रेसर्कुलेटिंग बॉल एंड नट स्टीयरिंग

इनके बारे में थोड़ा सा और अधिक से जानते हैं

वर्म एंड रोलर स्टीयरिंग

इस  स्टीयरिंग सिस्टम में में वर्म का प्रयोग किया जाता है और स्टीयरिंग एक रोलर के द्वारा गियर बॉक्स से जुड़ा होता है स्टीयरिंग व्हील घूमने पर वर्म घूमता है।और रोलर घूमकर सैक्टर शाफ़्ट को घुमाता है । रोलर सैक्टर शाफ़्ट के साथu आकार के खांचे में बियरिंग के जरिये लगा होता है ।

 

 रैक एंड पिनियन स्टीयरिंग

इस  स्टीयरिंग सिस्टम में रैक का उपयोग किया जाता है । जिसके दोनों सिरों पर टाई रॉड और बॉल जॉइंट लगे होते हैं । जो स्टव एक्सल से सम्बंधित होते हैं ।

स्टीयरिंग शाफ़्ट के निचले हिस्से पर पिनियन लगी रहती है । जिस पर रैक के अनुसार टीथ बने होते हैं । जब स्टीयरिंग व्हील टर्न किया जाता है तो पिनियन के द्वारा रैक दाएं बाएं खिसकता है । और इससे स्टव एक्सल घूमकर टाई रॉड की सहायता से पहियों को मोड़ता है ।

 

हाइड्रोलिक असिस्टेड स्टीयरिंग

इस प्रकार के सिस्टम में हाइड्रोलिक पावर का उपयोग किया जाता है । एक रिजर्वायर में हाइड्रोलिक                                                                                          आयल भरा रहता है । जो एक हाइड्रोलिक पम्प से जुड़ा रहता है ।

इस पम्प से दो पाइप आयल के आने जाने के लिए एक स्पूल वाल्व से जोड़े जाते हैं ।जो एक पावर सिलिंडर से जोड़े जाते हैं । ये वाल्व इस सिस्टम का मुख्य हिस्सा           है । एक ड्रैग लिंक इस वाल्व से जुडी होती है ।

जब स्टीयरिंग व्हील को घुमाया जाता है तो सैक्टर शाफ़्ट ड्रैग लिंक स्पूल वाल्व पर दबाव डालता है जिससे नॉन रिटर्न वाल्व खुलता है । और पम्प द्वार             आया हाइड्रोलिक आयल स्टीयरिंग आर्म के प्रबावित करके पहियों को मोड़ता है । इसमें पावर काम लगती है ।or स्टीयरिंग मुड़ने का कार्य जल्दी होता है ।

कैम एंड रोलर स्टीयरिंग

इसमें स्टीयरिंग शाफ़्ट के साथ वर्म जुड़ा होता है । पर सैक्टर की जगह पर कैम का प्रयोग किया जाता है । जिस पर                                                                          दो खूँटी रोलर का जैसे लगे होते हैं ।

स्टीयरिंग घूमने पर वर्म में लगे रोलर कैम को अप डाउन करते हैं । और क्रॉस शाफ़्ट जो दो बियरिंगों  के जरिये फिट रहती है । घूमकर ड्रॉप आर्म को आगे पीछे                करती है । जिससे  स्टीयरिंग गतिशील होता है ।

 

वर्म एंड व्हील स्टीयरिंग

ये स्टीयरिंग सिस्टम वर्म एंड सैक्टर शाफ़्ट की तरह ही लगभग होता है । पर सैक्टर के जगह में चौथाई से भी काम भाग का गियर प्रयोग किया जाता है । सैक्टर शाफ़्ट के ऊपर वर्म व्हील फिट किया जाता है और सभी वर्म एंड सैक्टर शाफ़्ट की तरह ही होते हैं

 

वर्म एंड सेक्टर स्टीयरिंग

इस  सिस्टम में स्टीयरिंग शाफ़्ट के निचले हिस्स्से पर एक वर्म बनाया जाता है और इसे सेक्टर से जोड़ा जाता है । वर्म के निचले तथा ऊपरी हिस्से में दो बियरिंग लगाए जाते हैं । और निचले बियरिंग के साथ नट लगी रहती है । जिसके जरिये वर्म गियर की प्ले एडजस्ट होती है ।

 

रेसर्कुलेटिंग बॉल एंड नट स्टीयरिंग

इस सिस्टम मेंरेसर्कुलेटिंग बॉल एंड नट का उपयोग होता है । शाफ़्ट के निचले हिस्से पर और स्टीयरिंग की तरह ही वर्म लगा रहता है

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धन्यवाद

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