फ्यूल इन्जेक्शन पम्प क्या है ? इसके कार्य और प्रकार

फ्यूल इन्जेक्शन पम्प

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे कि फ्यूल इन्जेक्शन पम्प क्या होता है तथा इसका प्रयोग किस प्रकार के इंजन में किया जाता है । और ये कैसे कार्य करता है । तो चलिए देर न करते हुए जानते हैं फ्यूल इंजेक्शन पम्प के बारे में 

फ्यूल इन्जेक्शन पम्प F.I.P

जिस प्रकार से पैट्रोल में में फ्यूल को जलाने के लिए स्पार्क प्लग का प्रयोग किया जाता है । उसी प्रकार से  फ्यूल इन्जेक्शन पम्प प्रयोग डीजल इंजन में किया जाता है । और इसे F.I.P भी कहा जाता है । फ्यूल इन्जेक्शन पम्प फ्यूल फ़िल्टर और फ्यूल इंजेक्टर के बीच में लगा होता है । फ्यूल इन्जेक्टर पम्प और इन्जेक्टर के बीच में फ्यूल लाइन लगी होती है । जिसे हाई प्रेशर लाइन भी कहा जाता है । इन्ही लाइनों के माध्यम से ईंधन इंजन सिलेंडर तक पहुंचता है । ये फ्यूल पम्प डीजल को धुंए से रूप में बहुत बारीक कणो में तोड़ता है । और कंबस्शन चेम्बर में कम्प्रेशन स्ट्रोक के ख़त्म होते ही डीज़ल का स्प्रे गर्म हवा पर किया जाता है । जिससे डीजल हवा के संपर्क में आते ही उच्च दाब के कारण जल जाता है । 

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फ्यूल इंजेक्शन पम्प कितने प्रकार के होते हैं ?

डीजल को पहुँचाने के लिए कई प्रकार के फ्यूल पम्पों को प्रयोग किया जाता है । जिनमें तीन प्रमुख हैं

  • मास्टर फ्यूल इंजेक्शन पम्प – इसमें high pressure पम्प का उपयोग किया जाता है । ये प्लंजर पम्प होता है । इसके माध्यम से डीजल हाई प्रेशर पर इंजेक्टरों में जाता रहता है ।

           इसे कॉन्स्टैण्ट प्रैशर सिस्टम भी कहते है ।क्यूंकि इस सिस्टम में प्रत्येक इंजेक्टर में एक सामान डीजल का दबाव बना रहता है ।और                     फायरिंग क्रम के अनुसार हर एक इंजेक्टर समय पर डीजल का स्प्रे महीन कणों के रूप में करता है

  • इंडिविजुअल इंजेक्शन सिस्टम – आधुनिक दौर में इसका प्रयोग अधिकतर डीजल इंजिनों में किया जाता है । ये काफी सरल है और काफी अच्छी भी । इसमें हर एक सिलेंडर के इंजेक्टर के लिए अलग पम्प रहता है ।

           ये पम्प अलग अलग हो सकते हैं । पर एक से अधिक सिलेंडरों में वाले इंजन में ये ये एक ब्लॉक लाइन में रहते हैं । इनके लिए एक अलग             केम शाफ़्ट का उपयोग पम्प में ही किया जाता है ।

           ये सभी पम्प अपनी केम के माध्यम से वाल्वों की तरह अपना कार्य करते हैं । ये केम शाफ़्ट टाइमिंग गियर से चलायी जाती है । ये पम्प                 इस प्रकार डिज़ाइन किया जाता । कि इसके द्वारा स्प्रे डीजल के साथ साथ हर एक इंजेक्टर द्वारा स्प्रे के शुरुआत और                                         समाप्ति के अंतर पर कंट्रोल किया जा सके

 

  • डिस्ट्रीब्यूटर इंजेक्शन सिस्टम – इस सिस्टम में हाई प्रेशर पम्प का उपयोग किया जाता है । जो डीजल को हाई प्रेशर देकर डिस्ट्रीब्यूटर का माध्यम से फायरिंग क्रम के अनुसार सभी इंजेक्टरों तक समय पर पहुंचाता है ।

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फ्यूल इंजैक्शन पम्प के मुख्य भाग

  • प्लंजर
  • डिलीवरी वाल्व
  • वाल्व स्प्रिंग
  • कण्ट्रोल रैक
  • गवर्नर
  • बैरल
  • केम शाफ़्ट
  • कण्ट्रोल स्लीव

फ्यूल इंजेक्शन पम्प में सबसे ऊपर इंजेक्टरों को डीजल पहुँचाने के लिए पाइप जोड़ने का प्रबंध रहता है । सबसे नीचे केम लगी होती है । जिसके ऊपर रोलर टैपिट लगे होते हैं । जिसके माध्यम से प्लंजर ऊपर उठते हैं । पम्प बैरियल में सबसे ऊपर डिलीवरी वाल्व लगा होता है । जो स्प्रिंग की सहायता से बंद रहता है । और डीजल के दबाव से खुलता है । बैरियल के मध्य में एक कंट्रोल स्लीव लगी होती है । 

फ्यूल इंजैक्शन पम्प के क्या क्या कार्य हैं ?

  • डीजल इंजन में कम्प्रैशन स्ट्रोक के दौरान हवा का प्रेशर दबने के कारण अत्यधिक बढ़ जाता है । ये लगभग 35 बार से 2000 तक हो सकता है । और ये अलग अलग इंजनों में अलग हो सकता है ।

          जैसे पुराने समय में इंजनों का प्रेशर मान कम होता था । पर बदलते दौर आज के समय में  इंजनों का प्रेशर मान 350 बार से 2000 तक              हो सकता है ।

          ये जान लीजिये कि अगर हवा का दबाव जलने से ठीक पहले अगर लगभग 350 बार के आस पास है तो उस समय डीजल को इंजन                    सिलेंडर में इंजेक्ट करने के लिए डीजल का प्रैशर हवा के दबाव से अधिक होने चाहिए।

          इसलिए डीजल को सिलेंडर में भेजने के लिए डीजल के प्रैशर को बढ़ाया जाता है । और फ्यूल पम्प डीजल प्रैशर को 2000 बार तक बढ़ा            देते हैं ।

  • इंजन को उसकी अलग चाल और लोड के अनुसार ईंधन की मात्रा की आवश्यकता होती है  जैसे इंजन  पर अगर अधिक लोड है । तो ईंधन को अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है । और अगर लोड कम है तो कम ईंधन की आवश्यकता होती है । इसलिए आवश्यकता अनुसार फ्यूल की मात्रा को पहुँचाना फ्यूल इंजैक्शन पम्प का कार्य होता है ।

 

  • इंजन में जितने सिलेंडर लगे होते हैं एक सामान परिस्तिथि मैं प्रत्येक सिलेंडर को सामान फ्यूल मात्रा की आवश्यकता होती है । ये फ्यूल इंजैक्शन पम्प का कार्य होता है कि हर एक सिलेंडर को सामान मात्रा में फ्यूल सप्लाई करना । सही समय पर फ्यूल का इंजैक्शन करना फ्यूल इंजैक्शन टाइमिंग कहलाता है ।

 

  • यदि किसी सिलेंडर में कम्प्रैशन स्ट्रोक के अंत में पिस्टन के T.D.C पर पहुँचाने से 15 डिग्री पहले डीजल का इंजैक्शन होना है । तो ठीक इसी समय पर इंजैक्शन होना ही चाहिए यदि अगर ठीक इसी समय पर डीजल स्प्रे नहीं होता है । तो ईंधन सही से नहीं जल पता है ।

 

  • लोड एवं गति के अनुसार फ्यूल इंजैक्शन टाइमिंग को एडजस्ट करना इसको समझते है । फ्यूल का इंजैक्शन T.D.C से 15 डिग्री पहले होना है । और अब यदि इंजन की गति बढ़ा दी जाए तो जाहिर है ।

पिस्टन तेजी से गति करेगा और ईंधन को जलने के लिए कम समय मिलेगा इस अवस्था में ईंधन को 15 डिग्री के स्थान पर पहले इंजेक्टर करना पड़ेगा इंजन की गति के अनुसार डीजल को लगभग 20 डिग्री से लेकर 45 डिग्री पहले तक इंजेक्ट करना पड सकता है । तो लोड एवं स्पीड के अनुसार फ्यूल इंजैक्शन पम्प टाइमिंग सेट करने कार्य करता है ।

 

आपने जाना कि फ्यूल इंजेक्शन पम्प क्या होता है । कितने प्रकार के होते हैं । और किस प्रकार कार्य करते हैं । और किस प्रकार के इंजन में इसका प्रयगो किया जाता है ।

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धन्यवाद 

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