फोर स्ट्रोक इंजन क्या है । और कैसे कार्य करता hai

फोर स्ट्रोक

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का इ और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे की फोर स्ट्रोक इंजन क्या है । और ये कैसे कार्य करता है । तो चलिए देर न करते हुए जानते हैं इसके बारे में

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मोटर गाडी का मुख्य भाग है इंजन क्यूंकि पावर इंजन से ही जेनेरेट होती है । इंजन कई प्रकार के होते हैं और इनमें से ज्यादातर दो सिद्धांत पर कार्य करते हैं फोर स्ट्रोक और टू स्ट्रोक हम इस पोस्ट में फोर स्ट्रोक के बारे में जानेंगे

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फोर स्ट्रोक इंजन क्या है

 

विश्वभर के अनेक वैज्ञानिकों ने सन 1838 से 1862 तक के समय में अपने प्रकार से प्रयोग करके शुरुआती इंजन बनाने में कुछ हद तक सफलता प्राप्त की

और उसके बाद लगभग सन 1878 के समय में एक जर्मन वैज्ञानिक ऑटो ने इस थ्योरी का अविष्कार किया था इस थ्योरी में अगर सामान्य शब्दों में कहा जाये तो पैट्रोल और हवा के दबे हुए मिश्रण को जलाया जाता है ।

 

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और इंजन में लगी क्रैंक शाफ़्ट के दो चककरों में इंजन को एक बार पावर प्राप्त होती है । और

अन्य तरीके से समझा जाए तो इस थ्योरी में सिलिंडर में लगे पिस्टनों के चार स्ट्रोकों में एक पावर में एक पावर स्ट्रोक होता है ।

साथ ही क्रैंक शाफ़्ट के एक चक्कर में पिस्टन के दो स्ट्रोक होते हैं इस थ्योरी को ” ऑटो प्रिन्सिपल ऑफ फोर स्ट्रोक साइकिल के कहा जाता है ।

इस पूरे साइकिल में पोस्टों के चार स्ट्रोकों में एक लाभकारी स्ट्रोक होता है । जिस स्ट्रोक से इंजन को पावर प्राप्त होती है ।

और अन्य तीन स्ट्रोक इंजन साइकिल को पूरा करते हैं । और ये स्ट्रोक पावर स्ट्रोक के समय फ्लाई व्हील को मिली गति द्वारा घूमने से पूरा होते हैं ।

 

4 स्ट्रोक इंजन कैसे कार्य करता है

 

फोर स्ट्रोक इंजन में निम्न चार स्ट्रोक होते हैं

सक्शन स्ट्रोक

 

इस स्ट्रोक में पिस्टन T.D.C से B.D.C की और चलता है । इस समय इनलेट वाल्व खुल जाता है । और उस मार्ग से फ्यूल और हवा का मिश्रण सिलेंडर में जाता है । सिलेंडर में पिस्टन के B.D.C पर जाने से सिलेंडर में खाली स्थान रहता है । जिसमें हवा और फ्यूल  का मिश्रण भर जाता है ।

 

कम्प्रेशन स्ट्रोक

यह इंजन का दूसरा स्ट्रोक होता है । इसमं पिस्टन B.D.C से T.D.C की ओर चलता है । ओर इस समय मैं सक्शन स्ट्रोक के समय खुला हुआ इनलेट वाल्व बंद हो जाता है ।

इस स्तिथि मैं पिस्टन के T.D.C तक चलने से सिलेंडर में भरे हुए मिश्रण पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है । ओर मिश्रण को पिस्टन से ऊपर निकलने का मार्ग नहीं मिलता है । क्यूंकि दोनों वाल्व बंद होते हैं जिससे वह सिलेंडर हैड मैं बने COMBUSTION  चेम्बर में दब जाता है ।

 

पावर या फायरिंग स्ट्रोक

ये पिस्टन का तीसरा स्ट्रोक होता है । इसमें सिलेंडर में दबे हुए मिश्रण को जलाया जाता है । इस प्रक्रिया में एक विस्फोट होता है । ओर गैसें बहुत ताकत से फैलती हैं । इसी से पावर प्राप्त होती है । गैसों के फैलने से 

 

एग्जॉस्ट स्ट्रोक

ये चौथा स्ट्रोक होता है । और अंतिम स्ट्रोक इसमें पिस्टन के द्वार एक साइकिल में पूरा होता है । इसमें जली हुई गैसों को सिलेंडर से बाहर निकाला जाता है ।

एग्जॉस्ट वाल्व द्वारा जाली हुई गैसें बाहर निकल जाती हैं और पिस्टन फिर से B.D.C से T.DC की और चलता है । पिस्टन के ऊपर चलने से सिलेंडर की जली निष्क्रिय गैसों का दबाव पड़ता है ।

इस कारण वे गैसें एग्जॉस्ट वाल्व । एग्जॉस्ट मैनिफॉल्ड और साइलेंसर से होकर बाहर निकलती हैं ।  

 

वाल्व टाइमिंग क्या है ?

ये वाल्व अधिकतर इंजन के हैड में लगे रहते हैं । इनलेट वाल्व और एग्जॉस्ट वाल्व इंजन साइकिल में सक्शन स्ट्रोक के समय इनलेट वाल्व पिस्टन के T.D.C पर खुलना चाहिए और एग्जॉस्ट स्ट्रोक के समय एग्जॉस्ट वाल्व B.D.C पर खुलना चाहिए

ठीक दूसरे प्रकार सक्शन स्ट्रोक समाप्त होने के बाद इनलेट वाल्व B.D.C पर बंद होना चाहिए और एग्जॉस्ट वाल्व एग्जॉस्ट स्ट्रोक के पूरे होने के बाद T.D.C पर बंद होना चाहिए ।

इनलेट वाल्व T.D.C से B.D.C तक लगभग 1800 खुलता है ।  और एग्जॉस्ट वाल्व भी B.D.C से T.D.C तक 180०  ही  खुलता है । ये सिर्फ सैद्धांतिक आंकड़े हैं पर वास्तव में इनलेट वाल्व सक्शन स्ट्रोक शुरू होने से कुछ डिग्री पहले ही खुल जाता है ।

और एग्जॉस्ट वाल्व भी एग्जॉस्ट स्ट्रोक शुरू होने से पहले कुछ डिग्री खुल जाता है । और सक्शन स्ट्रोक में कुछ डिग्री खुला रहता है । 

इनलेट वाल्व के  पूर्व और बाद में खुलने के फायदे – वाल्व से पूर्व में खोलने से सक्शन स्ट्रोक के समय अधिक से अधिक ताजा मिश्रण सिलेंडर में प्रवेश करता है । इंजन की तेज गति से समय वाल्व को खुलने में कुछ समय लग जाता है ।

चाहे वो कम से कम समय क्यों न हो जब इनलेट वाल्व के सक्शन स्ट्रोक शुरू होने से पहले खुलने और देर तक खुलने से सक्शन स्ट्रोक में । पैट्रोल और हवा का मिश्रण के आते समय इनलेट मेनीफोल्ड में गति बन जाती है । और इस कारण मिश्रण आता रहता है । 

एग्जॉस्ट वाल्व को पूर्व और बाद में खुले रहने के फायदे – इस वाल्व के अधिक समय तक खुलने से फायदे हैं । की एग्जॉस्ट स्ट्रोक के समय अधिक से अधिक गैसें सिलेंडर से बाहर निकल सकें ।

एग्जॉस्ट वाल्व को पावर स्ट्रोक के समय में ही खोलने से इंजन की शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं रहता है । क्यूंकि गैसों के फैलने से एक बार ही पिस्टन को धक्का लगा जाता है ।

और बाद में उन गैसों में कोई पावर नहीं रह जाती है । केवल एग्जॉस्ट वाल्व को सक्शन स्ट्रोक के समय भी कुछ डिग्री खोलने का ताजा मिश्रण भी सिलेंडर की जली गैसों के साथ बाहर निकल जाता है । और बहुत कम मात्रा में बेकार जाता है । 

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धन्यवाद

 

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