टर्बोचार्जर क्या है ? और कैसे काम करता है

टर्बोचार्जर

दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में क्या आप जानते हैं कि टर्बोचार्जर क्या होता और ये इंजन में किस प्रकार कार्य करता है और इंजन में इसकी क्या भूमिका है । अगर नहीं तो आज हम जानेंगे कि टर्बोचार्जर क्या है । और ये कैसे काम करता है । तो चलिए है टर्बोचार्जर के बारे में 

टर्बो इंजन क्या है

एक इंजन अपने सामान्य तरीके से जितनी पावर जेनरेट करता है वो पावर पहियों तक पहुंचती है उसी इंजन में और अधिक पावर बनाने के लिए गाड़ियों में एक मेकेनिज़्म का प्रयोग किया जाता है । जिसे हम टर्बो चार्जर कहते हैं । और जिन गाड़ियों में टर्बो चार्जर का प्रयोग होता है । उन इंजन को हम टर्बो इंजन कहते हैं ।   आप सभी ने सुना होगा कि गाड़ियों में टर्बोचार्ज इंजन लगा होता है । आज  के बदलते दौर में बदलती टेक्नोलॉजी के चलते गाड़ियों में भी दिन प्रतिदिन बदलाव देखने को मिलते है । उन्ही में में से एक है टर्बो इंजन 

एक है नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन और दूसरा है । टर्बोचार्ज इंजन 

नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन सामान्य इंजनों को कहा जाता है । जिसमें इंजन अपने अनुसार हवा खींचता है । और सामान्य तरीके से जाली हुई गैसों को एग्जॉस्ट करता है । 

पर टर्बो इंजन में में एक टर्बो चार्जर का उपयोग किया जाता है । जो हवा को कम्प्रेश करके इनलेट वाल्व तक अधिक मात्रा में भेजता है । तो अब  जानते हैं कि टर्बोचार्जर क्या है 

डीजल इंजन क्या है ? और कैसे कार्य करता है

टर्बोचार्जर क्या है

पहले गाड़ियों में नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन का प्रयोग अधिक होता था । जिसमें कभी कबार फ्यूल पूर्ण रूप से नहीं जलता था इसके समाधान के लिए इंजनों में टर्बोचार्जर का प्रयोग किया जाता है ।

ये फोर्स इंडक्शन प्रिंसिपल पर कार्य करता है । सरल भाषा में कहें तो जो इसके द्वारा  कम्प्रेश हवा होती है । उसे इनलेट मेनीफोल्ड पर फोर्स करता है । कंबस्शन के लिए अथार्त हवा को तेजी से सिलेंडर में भेजता है । 

आप सभी भली भाँती जानते हैं । कि सामान्यतया इंजन के लिए फ्यूल के साथ साथ हवा का मिश्रण जरूरी होता है । जो फ्यूल को जलने में सहायक होता है । सामान्य स्तिथि में इंजन के इंटेक वाल्व से हवा का प्रवेश इंजन के सिलेंडर में प्रवेश करती है ।

जो कि एक इंजन की प्रक्रिया होती है । इंजन जितनी हवा खींच पाता है । उतनी ही हवा सिलेंडर में प्रवेश करती है। 

जिससे जो फ्यूल होता है । वो अधिकतर पूर्ण रूप से नहीं जल पाता है । और कुछ फ्यूल की मात्रा जल नहीं पाती है । और combustion ठीक से नहीं हो पाता है । इसके लिए इंजन में टर्बोचार्जर का उपयोग किया जाता है । जिससे इंजन अधिक पावर जेनरेट कर पाता है । जिससे गाडी को एक्स्ट्रा पावर मिलती है । 

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टर्बोचार्जर के मुख्य भाग

  • कम्प्रैशर हाउजिंग 
  • कम्प्रैशर व्हील 
  • बियरिंग 
  • आयल सील 
  • शाफ़्ट 
  • टरबाइन व्हील 
  • टरबाइन हाउजिंग 

टर्बो चार्जर की बनावट

टर्बोचार्जर इंजन के एग्जॉस्ट मेनीफोल्ड के उस भाग पर लगाया जाता है । जहाँ से जली हुई गैसें बाहर निकलती हैं । क्यूंकि ये एग्जॉस्ट से निकलने वाली गैसों से चलता है । एक टर्बो चार्जर में अंदर की तरफ दो व्हील लगे होते हैं । जो कि एक ही शाफ़्ट से जुड़े होते हैं । यदि एक व्हील घूमता है ।

तो दूसरा व्हील भी उसके साथ घूमता है । एक टरबाइन व्हील से एग्जॉस्ट गैसें बाहर निकलती हैं । और कम्प्रेश व्हील से हवा खींची जाती है । इसी में अन्य कई कॉम्पोनेन्ट भी फिट किये जाते हैं 

टर्बोचार्जर कैसे काम करता है

फ्यूल जलने से एग्जॉस्ट गैसें बाहर निकलती हैं ।क्यूंकि टर्बोचार्जर इंजन के एग्जॉस्ट मेनीफोल्ड पर लगा रहता है । तो जब इंजन स्टार्ट होता है । और एग्जॉस्ट गैसें बाहर निकलती हैं । तो वो टरबाइन व्हील पर प्रेशर देती है । और टरबाइन घूमने लगती है ।

  इसके साथ में लगी दूसरी टरबाइन भी घूमने लगती है । जो कि एयर फ़िल्टर से साफ़ हवा को खींचती है । और उसको आगे सिस्टम में भेजती है । यह हवा इनलेट मेनीफोल्ड पर दबाव बनाये रखती है । और जैसे ही इनटेक वाल्व खुलता है । तो अधिक से अधिक हवा सिलेंडर में प्रवेश करती है । और एग्जॉस्ट भी तीव्र गति से होता है । 

टर्बोचार्जर के लाभ

टर्बो चार्जर का प्रयोग वर्तमान समय में बहुत होता है खासकर स्पोर्ट्स गाड़ियों में इसका प्रयोग अधिक किया जाता है । एक टर्बो चार्जर से कई लाभ होते हैं । जैसे  टर्बो चार्जर अधिक मात्रा में हवा को खींचता है । और तेजी से इंजन में भेजता है । जिससे कि इंजन के combustion चेम्बर में अधिक मात्रा में हवा आ पाती है ।  हवा के संपर्क में फ्यूल अधिक बेहतर से जल पाता है । 

इसके कारण फ्यूल की सम्पूर्ण मात्रा बिना बर्बाद हुए अच्छे से जलती है । फ्यूल की क्षमता भी बेहतर होती है । तथा पावर स्ट्रोक के समय बेहतर पावर प्राप्त होती है 

टर्बोचार्जर की कमी 

टर्बो लेग

जब इंजन स्टार्ट होता है । तो उस समय एग्जॉस्ट का प्रेशर कम रहता है । जिससे टर्बो चार्जर सिस्टम में टर्बो को शुरू होने के लिए कुछ समय लगता है । यह तब शुरू होता है । जब टरबाइन हाईस्पीड R.P.M से घूमती है । क्यूंकि ये एग्जॉस्ट गैसों से घूमता है । तो इसके लिए कुछ समय लगता है । इंजन से शुरू होने और टरबाइन के घूमने के मध्य जो समय रहता है । उसे टर्बो लेग कहते हैं । 

टर्बो चार्जर के प्रकार
  • single turbo 
  • twin turbo 
  • twin scroll turbo 
  • variable twin scroll ( VGT)
  • sequential turbo 
  • series turbo 
  • power pulse 
  • quad turbo
  • electrically assist 
  • perallel turbo
  • twin charger 
  • ignition delay antilag 

आपने जाना कि टर्बोचार्जर क्या होता है । इसकी बनावट कैसी होती है । और ये कैसे कार्य करता है ।  आप को ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें और पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें । तथा हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

धन्यवाद 

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