चेसिस फ्रेम क्या होता है ? और कितने प्रकार के होते हैं

चेसिस फ्रेम

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का फिर एक बार एक नयी पोस्ट में  दोस्तों आज का विषय है चेसिस फ्रेम क्या होता है ? तो चलिए इसके बारे में  जानते हैं

 

चेसिस क्या है 

जैसा कि आप सभी जानते हैं  कि मोटर गाडी बहुत सारे  कॉम्पोनेन्ट से मिलकर बनी होती है। उन्ही मैं से एक मुख्य भाग  है चेसिस । या यूँ कहें कि चेसिस किसी भी गाडी का आधार भाग है ।

क्यूंकि मोटर गाडी के अधिक से अधिक कॉम्पोनेन्ट चेसिस से जुड़े होते  हैं । और एक पूरी गाड़ी का निर्माण करते हैं।आप ऐसा कह सकते हैं कि चेसिस गाडी का वह मुख्य भाग हैं । जिस से  सम्पूर्ण गाडी का निर्माण होता हैं। चेसिस पर बहुत से पार्ट्स जुड़े होते हैं।

chassis

जैसे इंजन, ट्रांसमिशन सिस्टम,गियर बॉक्स, रेडिएटर, फ्रंट एक्सल, रियर  एक्सल गाडी की बॉडी और भी बहुत कुछ चेसिस बहुत मजबूत बनाये जाते हैं। जो कि गाडी का भार तथा सड़क से लगने वाले झटके और गति परिवर्तन के समय लगने वाले झटके को सहन करता हैं। और गाडी को बैलेंस करके रखता है 

ये मुख्यतः  3 भागों में बनाये जाते हैं

    1. बॉक्स टाइप
    2. चैनल टाइप
    3. ट्यूब  टाइप 

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चेसिस फ्रेम कितने के प्रकार होते हैं 

चेसिस फ्रेम मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं –

 

1 . कम्बाइन्ड चेसिस फ्रेम – 

      इस प्रकार के फ्रेमों का प्रयोग अधिकतर छोटे वाहनों में किया जा रहा है । जैसे – कार आदि । इस प्रकार के फ्रेमों में चेसिस फ्रेम अलग से            नहीं होते हैं।


गाडी कि बॉडी और फ्लोर मिलकर ही चेसिस का काम करते हैं । इन्हें बहुत ही मजबूत बनाया जाता  हैं। इनको बनाने के लिए          भारी            स्पात चादरों का प्रयोग किया जाता है

 

      इनमें बॉडी और चेसिस को अलग नहीं किया जा सकता है। ये बहुत मजबूत होता  है। और गाडी में लगने वाले झटकों को आसानी के सहन          कर लेता  है ।

     और देखने में भी काफी आकर्षक होता है। और भार में भी ये प्रायः काफी हल्के होते हैं । पर इनमें प्रायः कुछ बातों का ध्यान  रखना                     आवश्यक है।

     जैसे इनको बनाते समय जॉइंट्स को  बहुत मजबूत बनाना पड़ता है। जिससे कि ये निकले नहीं या खुले नहीं इसके साथ पूरे चेसिस फ्रेम पर         सामान भार हो । ड्राइविंग सीट से सड़क साफ़ दिखे ,अलग अलग कम्पनियां अपने तरीके से चेसिस फ्रेम  डिजानिंग करती हैं।

 

2 .  कन्वेंशनल चेसिस फ्रेम

     इस तरह के चेसिस का उपयोग भारी वाहनों में किया जाता है जिनका उपयोग  मुख्य तौर पर भारी सामान ढोने में किया जाता हैं।  इनमें दो        लॉन्ग मेम्बर्स होते हैं।

    तथा इनको बहुत सारे क्रॉस मेम्बरों से जोड़ा जाता हैं और ये आगे से कम चौड़े होते हैं। लोंग मेंबर्स और क्रॉस मेंबर्स पे ही मोटर गाडी के                अधिकांश भाग  फिट किए जाते हैं

   और गाडी की बॉडी भी इन्ही पर फिट की जाती हैं। लोंग  मेंबर्स चैनल टाइप बने होते हैं।और क्रॉस मेंबर्स बॉक्स टाइप बने होते हैं। ध्यान रहे          की मध्यम भार की गाड़ियों में जैसे कि मेटाडोर आदि मैं ट्यूब टाइप चेसिस उपयोग किये जाते हैं।

    अगर किसी कारण चेसिस में  बेंड आ जाए तो तो उसे सीधा करना आवश्यक हो जाता हैं नहीं तो पहिये घिसते है और स्टीयरिंग कंट्रोल                 मुश्किल हो जाता हैं

 

3 . कास्ट चेसिस फ्रेम

      इस फ्रेम में इंजन के साथ साथ अन्य कंपोनेंट्स फिटिंग के लिए  तो हलके ढलान चेसिस फ्रेम का उपयोग किया जाता है । पर और                      ट्रांसमिशन बॉडी फ्लोर बोर्ड के साथ जोड़ी जाती है इस प्रकार के फ्रेम को सेमी इंटरगनल के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एक कमी ये है        कि जब ये किसी कारणवश टेढ़े हो गए तो इनको सीधा करना मुश्किल होता है। इसका प्रयोग भारत के साथ साथ विदेशों में भी होता है । 

चेसिस फ्रेम की देखभाल कैसे करें 

वैसे तो चेसिस अधिक समय तक बिना किसी खराबी के उपयोग होती रहती है । इसके लिए इसे काफी मजबूत बनाया जाता है । पर सड़क पर चलते चलते और खासकर बारिश में इस पर पानी पड़ने से इसमें जंग लग जाता है ।

और जंग के कारण चेसिस से पपड़ी के रूप में परतें गिरने लगती हैं । जिससे चेसिस कमजोर हो जाता है । और चेसिस को जोड़ने के लिए जो रिबिटस प्रयोग की जाती हैं वो भी ढीली हो जाती हैं ।

जिससे की चेसिस का एलायमेंट भी बिगड़ जाता है ।    प्रकार की समस्या से बचने के लिए इसमें इनेमिल पेंट का प्रयोग किया जाता है । इसके अतरिक्त ख़राब सड़कों पर भी गाडी चलाने से  झटके लगते हैं जिससे कभी कभी चेसिस में भी क्रैक आ जाते हैं ।

इनको ठीक करना आवयश्यक हो जाता है । क्यूंकि अगर ये अगर बढ़ते जाते हैं तो इससे चेसिस के टूटने का भय रहता है । इससे बचने के लिए क्रैक हुए भाग को ठीक से इलेक्ट्रिक वैल्डिंग करवा लेना चाहिए

और अगर क्रैक बड़ा हो तो वैल्डिंग के बाद एक और प्लेट इसके ऊपर वैल्ड कर देनी चाहिए इसके अतरिक्त अगर किसी दुर्घटना में चेसिस का आकार बगड़ जाता है । एलायमेंट में बदलाव हो सकता है

तो वैल्डिंग के बाद एलायमेंट चेक करना चाहिए । अन्यथा इसका प्रभाव स्टीयरिंग और गाडी की चाल पर पड़ जाता है । 

 

चेसिस के कुछ दोष  और मरम्मत कैसे करें 

कभी कबर किसी दुर्घटना के कारण चेसिस का एलायमेंट बिगड़  जाता है । इसे सही करने के लिए इसको साहुल द्वारा जांचा जाता है । इसे जांचने के लिए गाडी को समतल जगह पर खड़ा करके उसके चरों कोनो पर साहुल लटकाकर चिह्न लगाए जाते हैं ।

इसी प्रकार चेसिस मेम्बरों में बराबर दूरी पर दो चिह्न और अंकित किये जाते हैं । अब गाडी को उस स्थान से हटाकर सभी चिहनों को एक दूसरे से मिलाना पड़ता है ।

अगर एक सामान विकर्णो में अधिकतम 8 से 9mm का अंतर है तो चेसिस की मरम्मत आवयश्यक हो जाती है । एक चेसिस के निम्नलिखित दोष हो सकते हैं –

चेसिस के क्रॉस मेंबर टेढ़े हो गए हों 

साइड और क्रॉस मेंबर के रिबिट ढीले हो जाते हैं 

या साइड मेंबर ढीले हो गए हों 

 

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धन्यवाद 

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