गाडी की बैटरी क्या होती है ? कार्य और प्रकार

गाडी की बैटरी

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में इस  पोस्ट में हम जानेंगे कि गाड़ियों में प्रयुक्त होने वाली बैटरी क्या है । ये किस प्रकार से कार्य करती है । और ये कितनी प्रकार की होती हैं । चलिए देर न करते हुए जानते हैं कि गाड़ियों में प्रयुक्त होने वाली बैटरी क्या है । और कैसे कार्य करती है तो चलिए जानते हैं कि गाडी की बैटरी क्या है 

गाडी की बैटरी क्या है ?

गाडी की बैटरी क्या है जैसा कि आप सभी जानते हैं कि गाड़ियों में हेड लाइट और सेल्फ स्टार्टर को घुमाने के लिए जैसे कार्यों के लिए करंट की जरूरत होती है । जिसके लिए गाड़ियों में बैटरी का प्रयोग किया जाता है ।

क्यूंकि आप सभी भली भाँती जानते हैं । कि बैटरी एलेक्ट्रीसिटी सिस्टम का एक मुख्य भाग है । गाड़ियों में में लैड एसिड बैटरी का प्रयोग होता है । इस प्रकार की बैटरी की एक विशेषता है ।

कि इसको बार बार चार्ज और डिस्चार्ज कर सकते हैं । जिससे इसमें विद्युत वाहक बल पैदा होता है । और आंतरिक प्रतिरोध कम होता है ।

 

 

 

लैड एसिड बैटरी क्या है ?

चलिए जानते हैं कि लैड एसिड बैटरी क्या है । लैड एसिड बैटरी में एक से अधिक सेलों का एक सीरीज में प्रयोग करके बैटरी का निर्माण किया जाता है । इस प्रकार के सिस्टम में किसी भी प्रकार का विद्युत उत्पादन नहीं होता है ।

ये गाड़ियों में प्रयुक्त होने वाले डायनेमो और अल्टरनेटर से बनायीं पावर को प्राप्त करके ही उसे स्टोर करती है । किसी समय पर चार्जर द्वारा भी विद्युत स्टोर की जाती है । जिसके कारण इसे स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है ।

इस प्रकार की बैटरी स्टोर की गयी पावर को खर्च करके वापस पावर को स्टोर करती रहती है । और अन्य सूखे सेल एक बार अपनी पावर देने या खर्च करने के बाद बेकार हो जाते हैं ।

गाड़ी की बैटरी में पावर केमिकल पावर के रूप में स्टोर होती है । और इस केमिकल पावर का प्रयोग इलेक्ट्रिसिटी पावर के रूप में किया जाता है । और इस प्रकार की केमिकल पावर को इलेट्रिक पावर में बदलने के लिए सर्किट का प्रयोग किया जाता है ।

तो आप समझ गए होंगे कि लैड एसिड बैटरी क्या होती है । और ये किस प्रकार से कार्य करती है । तो चलिए अब जानते हैं कि एक बैटरी में मुख्य भाग कौन से होते हैं । और बैटरी की बनावट कैसी होती है ।

सेल्फ स्टार्टर क्या है ? और कैसे काम करता है

 

 

गाडी की बैटरी की बनावट कैसी होती है ?

चलिए जानते हैं कि गाडी की बैटरी की बनावट कैसी होती है । और और इसमें किन मुख्य भागों का प्रयोग किया जाता है । गाडी की बैटरी दिखने में एक आयताकार डिब्बे की सामान होती है ।

इस डब्बे में अलग अलग सेलों के लिए कॉलम बने होते हैं । एक बैटरी में जो सेल प्रयोग किये जाते हैं । उनमें हर एक सेल दो वोल्ट का होता है । इस प्रकार से एक बैटरी में जितने वोल्ट होते हैं ।

सेलों की संख्या उससे आधी होती है । और हर एक सेल के लिए अलग कॉलम प्रयोग किया जाता है । इसके साथ ही प्रत्येक सैल में पॉजिटिव तथा निगेटिव प्लेट होती हैं । ये प्लेटें आपस में अलग अलग होती हैं ।

और इनको अलग रखने के लिए इनमें सैपरेटर का प्रयोग किया जाता है । पॉजिटिव और नेगेटिव प्लेटें अलग अलग कनेक्टर द्वारा जुडी होती है । तथा प्रत्येक सैल के कनेक्टर से ऊपर टर्मिनल लगे होते हैं ।

इनका प्रयोग सैलों को बैटरी कंपाउंड और कवर से सील करने के बाद सैल कनेक्टरों से सीरीज में मतलब एक सैल को नेगेटिव और एक को पॉजिटिव से जोड़ा जाता है ।

जिसमें पहला और आखरी सैल एक में नेगेटिव और एक में पॉजिटिव सैल टर्मिनल बैटरी से बाहर निकले होते हैं । इन्हें टर्मिनल पोस्ट के नाम से भी जाना जाता है । बैटरी में एक होल बना रहता है । जिसमें प्रत्येक सैल में एलेक्ट्रॉइट भरा जाता है । और इन पर वैंट पॉइंट लगे होते हैं ।

डिस्ट्रीब्यूटर क्या है ? और कैसे कार्य करता है

 

 

इलेक्ट्रोलाइट क्या होता है ?

एक बैटरी में प्रयुक्त होने वाली प्लेटें अपने सैल बॉक्स में सल्फूरिक एसिड में डूबी रहती हैं । इस लिक्विड का घनत्व लगभग 1.253 से 1.281 तक रहता है ।

ये लिक्विड बनाया भी जा सकता है । बना हुआ भी उपलब्ध रहता है । इसे बनाने में शुद्ध गंधक डिस्टिल वाटर का तेजाब क एस्तेमाल किया जाता है । इसे किसी चीनी मिटटी कांच  और प्लास्टिक के बर्तन में बनाना चाहिए पर एक बात ध्यान रखना आवयश्यक है ।

कि एसिड को पानी में डालना चलिए अन्यथा यदि अन्यथा यदि एसिड को पानी में डालना चाहिए ।  अगर एसिड में पानी डालेंगे तो उसके छीटो से शरीर को नुकसान पहुँच सकता है । यह लिक्विड लगभग बैटरी की प्लेटों से लगभग 16 mm तक भरा रहना चाहिए । 

 

 

 

सैपरेटर क्या है

एक बैटरी में पॉजिटिव और नेगेटिव प्लेटें किस प्रकार आपस में टकराकर शार्ट न हो इसके लिए सैपरेटर प्रयोग किये जाते हैं । इनको बनाने के लिए प्लास्टिक वुड ग्लास फाइवर जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है ।

 

 

पॉजिटिव और निगेटिव प्लेट क्या होती है ?

मोटर गाड़ियों मैं लगभग 6V 8V जैसी बैटरियों का प्रयोग किया जाता है । इनमें वोल्ट के अनुसार सैलों की संख्या आधी होती है । इन सैलों में निगेटिव और पॉजिटिव प्लेटों का प्रयोग किया जाता है ।

इन प्लेटों का निर्माण सीसे से किया जाता है । जो दिखने में कुछ चौकोर और जालीनुमा होती हैं । इनमें पॉजिटिव प्लेटों पर लैड पराक्साइड भरा जाता है । ये दिखने में भूरे रंग की होती हैं ।

निगेटिव प्लेटों पर एंटिमनी भरा जाता है । उसका रंग स्लेटी होता है । सैल की शक्ति प्रयुक्त की गयी प्लेटों पर की संख्या और नाप पर निर्भर करती हैं ।

बैटरी में प्रत्येक सैल में अलग अलग निगेटिव और पॉजिटिव प्लेटों का समूह बनाकर उन्हें आपस में लगाया जाता है । और प्रत्येक प्लेट के बीच में सैपरेटर लगाए जाते हैं । जिससे वे आपस में शार्ट न हो निगेटिव प्लेट एक अधिक होती है । 

 

 

मैन टर्मिनल पोस्ट किसे कहते हैं

हर एक बैटरी में पहले और अंतिम सैल पर दो टर्मिनल निकले होते हैं । जिनमें एक पॉजिटिव और एक निगेटिव टर्मिनल होती हैं । इन मैन टर्मिनल पोस्टों पर बैटरी वायर जोड़कर अन्य स्थान पर विद्युत धरा पहुंचाई जाती है ।

ये टर्मिनल सीसे से बने होते हैं । जब भी बैटरी में केमिकल रिएक्शन होते हैं । उस समय इन टर्मिनल पर बैटरी टर्मिनल के वायर चिपक जाते हैं । 

 

 

इस पोस्ट में आपने जाना कि बैटरी क्या होती है । और इसकी बनावट कैसी होती है । और ये किस प्रकार से कार्य करती है । उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आयी हो आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें । और इस पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें और हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

धन्यवाद 

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published.