ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम क्या होता है

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और पोस्ट में दोस्तों क्या सभी जानते हैं कि ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम क्या है और यह कैसे कार्य करता है इस पोस्ट मैं हम सभी जानेंगे कि ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम क्या है इसकी बनावट कैसे होती है और ये कैसे कार्य करता है तो चलिए जानते हैं

ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम क्या है

ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम वतर्मान समय में सबसे अधिक प्रयोग बढ़ता जा रहा है । जिससे मोटर गाड़ी को चलाने मैं आसानी और गाडी से होने वाली नॉइस भी कम होती है । इस प्रकार की तकनीकी का प्रयोग गाड़ियों मैं दो प्रकार से किया जाता है

1 .  सेमी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन

2 . फुल्ली ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन

चलिए इनको थोड़ा सा और अच्छे से जानते है

  • सेमी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन इस प्रकार के ट्रांसमिशन में सिर्फ क्लच आटोमेटिक होता है । पर गियर ड्राइवर को ही                                                                  शिफ्ट करने पड़ते है । और गियर शिफ्ट करने के लिए क्लच को डिसएंगेज की जरूरत नहीं                                                                    होती है और इसमें टार्क कन्वेटर और फ्यूल फ्लाई व्हील का उपयोग किया जाता है

गियरबॉक्स क्या है ? कितने प्रकार होते हैं और कार्य

फ्लूइड फ्लाई व्हील या हाइड्रोलिक क्लच क्या  है ?

 

पहले से चली आ रही और ठोस और फ्रिक्शन फाॅर्स की जगह आज के समय महँगी गाड़ियों में द्रव से युक्त फ्लूइड कपलिंग या क्लच का उपयोग बढ़ता जा रहा है । इस प्रकार के क्लच में इंजन की पावर को गियर बॉक्स तक पहुँचाने के लिए  हाइड्रोलिक फ्लूइड का उपयोग किया जाता है ।

जिसके कारण ये हाइड्रोलिक क्लच कहलाते हैं । इसमें दो कप प्रयोग किये जाते हैं । इनमे एक ड्राइविंग मेंबर और दूसरा ड्रिवेन मेंबर होता है । ड्रिवेन मेंबर क्लच शाफ़्ट पे फिट रहता है ।

और दोनों मेंबर केसिंग में बंद रहते हैं । और साथ ही इस केसिंग में एक निश्चित मात्रा में हाइड्रोलिक फ्लूइड भरा रहता है । जब कभी इंजन चलता है तो फ्लाई व्हील के लगा ड्राइविंग मेंबर फ्लाई व्हील के साथ साथ घूमता है ।

इस मेंबर के सामने भरे हाइड्रोलिक फ्लूइड में बल लगता है इस बल से हाइड्रोलिक फ्लूइड में घूर्णी बल यानि ठोस बल उत्पन्न होता है ये बल क्लच शाफ़्ट पर लगे ड्रिवेन मेंबर को घुमाता है ।

और क्लच शाफ़्ट घूमकर इंजन की पावर को गियर बॉक्स तक पहुंचाती है और ड्राइवर मेंबर के द्वारा क्लच शाफ़्ट के घूमने की गति फ्लूइड में उत्पन्न घूरन बल पर निर्भर होती है मतलब जब इंजन चलता है ।

तो ड्राइविंग मेंबर हाइड्रोलिक फ्लूइड में अधिक घूर्णी बल उत्पन्न करता है।और इंजन की आइडियल गति पर फ्लूइड में कोई बल नहीं बनता है । साथ ही क्लच शाफ़्ट नहीं घूमती है । तथा इंजन और गियरबॉक्स का सम्बन्ध टूट जाता है ।

 

फ्रंट एक्सल और स्टीयरिंग सिस्टम जाने हिंदी में

  • फुल्ली ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन इस प्रकार के सिस्टम में क्लच के साथ गियर शिफ्ट का सिस्टम होता है आटोमेटिक होता                                                                     है । वाहन की गति के अनुसार आटोमेटिक ही गियर शिफ्ट होते रहते हैं इसके लिए इस                                                                       सिस्टम में  या एपी साइक्लिक प्लैनिटरी टाइप गियर बॉक्स का प्रयोग किया जाता है ।

 

प्लैनिटरी या एपी साइक्लिक  टाइप गियर बॉक्स क्या है ?

 

आज के बदलते दौर में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में महँगी गाड़ियों में इस प्रकार के गियर बॉक्स का उपयोग होता है ।

इसके साथ साथ आटोमेटिक ट्रांसमिशन सिस्टम और फ्लूइड फ्लाई व्हील या हाइड्रोलिक क्लच का प्रयोग भी किया जाता है एपीसाइक्लिक का अर्थ होता है । छोटा चक्र जिसके मध्य बड़े गोले के चक्र के घेरे पर होता है ।

जिससे न तो गियरों को शिफ्ट करने की जरूरत पड़ती है और सेंक्रोमेश तथा कॉन्टेक्ट मैश की तरह गियरों को लॉक तथा एंगेज करने की जरूरत होती है । और गियरों  में घिसावट भी कम होती है । और नॉइस तो शून्य के बराबर होती है । साथ इंजन से आयी हुई पावर भी कम खर्च होती है ।

 

एपीसाइक्लिक गियरबॉक्स की बनावट और भाग

इस प्रकार के गियरबॉक्स में चाल के अनुसार हाउसिंग लगे होते हैं । पर सेट में एक सन व्हील और दो या उससे अधिक प्लेनेट व्हील लगे होते हैं । प्रायः ये प्लेनेट एक एनेलस से जुड़े रहते हैं ।

और इसमें अंदर की तरफ से दांतें कटे रहते हैं । साथ ही प्लेनेट के साथ प्लेनेट कैरियर लगा होता है । जो प्लेनेट के शाफ़्ट पर बियरिंग की सहायता से जुड़ा होता है ।

जिससे जब इंजन चलता है तो इंजन शाफ़्ट की सहायता से सन व्हील घूमने लगता है । और जो प्लेनेट सन व्हील से जुड़े रहते हैं वो भी घूमने लगते हैं ।  और ये प्लेनेट एनलस को घुमाते हैं ।

इस स्तिथि में प्लेनेट गियर अपने स्थान पर ही घूमते हैं और गियर बॉक्स न्यूट्रल रहता है । और जब कोई गियर एंगेज करना होता है । तो उस सेट के एनलस को ब्रेक बैंड द्वारा जिस पर अंदर की और लैंगिंग चढ़ी होती है

रोक दिया जाता है । जिससे प्लेनेट गियर जो सन व्हील द्वारा घूम रहे थे वे एनलस के अंदर पूरे घेरे में घूमने लगते हैं । और पावर प्लेनेट कैरियर के माध्यम से डिफ्रेंशियल आदि को जाने लगती है ।

 

एपीसाइक्लिक गियर बॉक्स के मुख्य भाग

  • प्लैनेट शाफ़्ट
  • एनलस
  • प्लैनेट व्हील
  • सन व्हील
  • प्लेनेट कैरियर
  • ड्राइविंग शाफ़्ट
  • ब्रेक बैण्ड

 

एपीसाइक्लिक गियर बॉक्स के कुछ फायदे

  • इस प्रकार के गियरबॉक्स छोटे आकार में बनाये जा सकते हैं
  • इस प्रकार के गियरबॉक्स में गियर स्थायी रूप से आपस में मिले रहते हैं । और इसके साथ डॉग क्लच आदि का भी प्रयोग नहीं किया जाता है
  • इस प्रकार की वयस्था में गियर बदलना सरल होता है । और इसके लिए हैंडब्रेके के समान क्रिया करनी होती है ।
  • इसमें प्रत्येक स्पीड के लिए अलग अलग गियर सेटों का प्रयोग किया जाता है । जिससे कि गियरों की उम्र भी बढ़ जाती है

 

अभी आपने जाना कि ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन क्या होता है । और इसकी बनावट क्या है । और ये किस प्रकार से कार्य करता है । उम्मीद है ये जानकारी आपको अच्छी लगी हो आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें और इस पोस्ट को औरों के साथ %

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