इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम क्या है ? और कैसे कार्य करता है

इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में इस पोस्ट में हम जानेंगे कि इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम क्या है । और ये किस प्रकार से कार्य करता है । और एक ऑटोमोबाइल में इसकी क्या उपयोगिता है । तो चलिए देर न करते हुए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से

इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम क्या है?

ऑटोमोबाइल के बदलते दौर में गाड़ियों में बहुत से बदलाव होते रहते हैं । गाड़ियों में वर्तमान समय में पुराने समय की अपेक्षा बहुत सरे फीचर्स में बदलाव होते है जिनमें से एक है ।

इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम में दिवस को इंजन में लगाया जाता है ।   इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट ये प्रायः इंजन में लगाया जाता है । और इसे इंजन के दिमाग से भी जाना जाता है । ये सेंसर के रूप में कार्य करता है । ये एक इग्निशन सिस्टम का एक हिस्सा है ।

इस प्रकार के सिस्टम में प्राइमरी करंट को C.B पॉइंट के माध्यम से बनाने और तोड़ने की जगह पर E.C.U के जरिये यह कार्य किया जाता है । इस प्रकार के सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूटर और इग्निशन कोइल में कुछ हद तक अंतर पाया जाता है ।

जिससे वे उच्च वोल्टेज पर कार्य कर पाते हैं । इसमें लगभग 46000 V  का हाई वोल्टेज करंट जेनरेट होने के कारण स्पार्क प्लग में गैप कुछ सीमा तक अधिक रखा जाता है ।

इसके कारण स्पार्क प्लग की लम्बाई कुछ हद तक बढ़ जाती है । और स्पार्क प्लग मिश्रण को अच्छे से जला पाता है । जिससे इंजन को कम फ्यूल मिश्रण वाले अनुपात में भी चलाया जा सकता है । जिससे कम धुआं निकलता है । और फ्यूल की भी बचत होती है ।

 

 

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इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम कार्य करता है

इस प्रकार का सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटर के अंदर C.B पॉइंट की जगह पर प्राइमरी सर्किट को बनाने और तोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है । ये हॉल इफेक्ट सेंसर ये फिर प्लस के रूप में होता है ।

इसे इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट कहा जाता है । कंट्रोल यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिस्टर सर्किट प्रयोग किया जाता है । और E.C.U के द्वारा प्राइमरी सर्किट बनती और टूटती है । जिसके कारण हाई वोल्टेज का करंट बनना संभव हो पाता है ।

 

 

इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम कितने प्रकार के होते हैं

इस प्रकार का सिस्टम मुख्यतः तीन प्रकार का होता है जिनका विवरण आगे विस्तार से दिया गया है

  • हाफ इफेक्ट सेंसर – ये एक सेंसर के रूप में कार्य करता है । इसमें सेंसर में एक मैग्नेटिक पोल होता है । ये मैग्नेटिक पोल जब शटर के माध्यम से बीच में आने पर चुम्बीकीय किरणों को समाप्त करते हैं ।

           यही कार्य हॉल इफेक्ट सेंसर का होता है । कुछ इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूटर में चुंबकीय क्षेत्र को समाप्त करने के लिए                 इसका प्रयोग किया जाता है । एक स्टील शटर जब दोनों मैग्नेटिक पोलों के बीच में आता है ।

           तब तब उनके मध्य बनने वाली चुंबकीय किरण समाप्त हो जाती है । इस प्रकार के डिस्ट्रीब्यूटर में जो रोटर प्रयोग होता है । वो कवर्ड                   प्लेट के रूप में होता है । इसके कारण शटर सरलता से दोनों मैगनेट पोल के बीच में चलता है ।

           तो E.C.U को संकेत मिलता है । इसके विपरीत शटर जब बीच में नहीं होता है । तो मैग्नेटिक सेंसर वोल्टेज देता है । जैसे ही पुनः शटर                  बंद होता है । और प्राइमरी वोल्टेज समाप्त होती है । तो सेकेंडरी वाइडिंग में हाई वोल्टेज करंट बनता है ।

 

  • मैग्नेटिक कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम – इस प्रकार के सिस्टम में C.B पॉइंट का प्रयोग प्राइमरी सर्किट को तोड़ने और जोड़ने के लिए नहीं किया जाता है ।

           बल्कि इसमें एक घूमता हुआ मैग्नेटिक फिक्स कोइल प्रयोग किया जाता है । मैग्नेटिक फिक्स कोइल सेंसर कोइल के रूप में कार्य करता                है । जब जब मैग्नेट के घूमने से मैग्नेटिक फिक्स कोइल के सामने आती है ।

           तब सेंसर कोइल में करंट फिक्स होता है । और इस वोल्टेज को E.C.U के द्वारा प्रवाहित होने वाले प्राइमरी करंट को रोका जाता है । जब             करंट का प्रवाह समाप्त होता है ।

           तो इग्निशन कोइल की सेकेंडरी वाइंडिंग में हाई वोल्टेज का करंट उत्पन्न होता है । तो अब आप समझ गए होंगे कि ये क्या है और ये किस             प्रकार से कार्य करता है । इसके बाद है

 

  • कांटेक्ट कंट्रोल ट्रांजिस्टराइज्ड टाइप सिस्टम  ये एक पहले समय में प्रयोग किया जाने वाला एक सिस्टम हैं इस प्रकार के सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूटर के अंदर C.B पॉइंट का प्रयोग किया जाता है ।

          और साथ ही इसमें प्राइमरी सर्किट को जोड़ने और तोड़ने से पहले एक ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया जाता है । ये ट्रांजिस्टर सर्किट को                       जोड़ने और तोड़ने का कार्य करता है ।

           साथ ही इन ट्रांजिस्टरों मैं N और P प्रकार के पदार्थों के तीन भाग होते हैं । तथा इनमें बीच का भाग बेस कहलाता है । और इसके माध्यम             से ट्रांजिस्टर से प्रवाहित होने वाला करंट का नियंत्रण होता है ।

           इसके साथ ही एक भाग अमीटर और दूसरा भाग कलेक्टर कहलाता है  जब बीच वाले भाग में करंट चलता है । तीनो भागों में लगी स्लैब्स             नॉन कंडक्टर से  कंडक्टर में बदल जाती है ।

 

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E.C.U क्या है ?

E.C.U से तात्पर्य है इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट ये इंजन में एक दिमाग के सामान कार्य करता है । और इंजन में होने वाली गतिविधयों को नियंत्रित करता है ।

तथा साथ ही इंजन में आने वाले मिश्रण को नियंत्रित करता है । तथा इंजन की पावर को बढ़ाने में भी सहायता करता है । स्पार्क प्लग के द्वारा स्पार्किंग के समय इग्निशन की टाइमिंग को बेहतर करता है ।

सामान्यतः कहा जाए तो ये ये इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं जो इंजन पे लगाया जाता है । और इंजन में होने वाली तमाम गतिविधयों पर नियंत्रण करता है । और इंजन के पावर को भी बढ़ाने में मदद करता है । 

 

इस पोस्ट में हमने जाना कि इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम क्या होता है । और ये ऑटोमोबाइल में किस प्रकार से कार्य करता है ।आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें । और इस पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें और हमें

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