इंजन वाल्व क्या है ? और कितने प्रकार के होते हैं

इंजन वाल्व

हेलो दस्तों स्वागत है आप  सभी का फिर से एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे की इंजन वाल्व क्या है । ये कितने प्रकार के होते हैं । और और ये इंजन में क्या काम करते हैं । तो चलिए जानते हैं इनके बारे में

इंजन वाल्व क्या है

एक इंजन में किसी बहने वाली गैस या तरल पदार्थ के मार्ग को आवश्यकतानुसार खोलने और बंद करने के लिए जिन पोर्ट का प्रयोग किया जाता है ।

उसे इंजन वाल्व कहते हैं ये प्रायः बहुत प्रकार के होते हैं । जिन वाल्वों को खोलने के लिए मेकेनिकल प्रबंध होता है । वे मेकेनिकल वाल्व कहलाते हैं ।

और वहीँ कुछ वाल्व ऐसे भी होते हैं । जिनसे कोई तरल पदार्थ या गैस निकल तो सकती है । पर वापस नहीं आ सकती । ऐसे वाल्वों को नॉन रिटर्न वाल्व कहते हैं ।

वाल्वों का प्रयोग प्रायः टू स्ट्रोक इंजन में नहीं किया जाता है । इनमें सिलेंडर के दीवारों पर ही पोर्ट बने होते हैं । वाल्वों का प्रयोग फोर स्ट्रोक इंजन में किया जाता है । इंजन वाल्व डिज़ाइन के आधार पर ये तीन प्रकार के होते हैं । जो निम्नलिखित हैं –

स्लाइडिंग स्लीव वाल्व – इनका प्रयोग पहले किया जाता था वर्तमान समय में इनका प्रयोग नहीं किया जाता है । ये प्रायः COMBUSTION चेम्बर में लगाए जाते थे ।

ये ऊपर नीचे चलकर पोर्ट को खोलते और बंद करते थे । और साथ ये ऊपर नीचे चलते समय घूमते भी थे । इस प्रकार के वाल्वों में बहुत प्रबंध करने पड़ते थे । इनमें घर्षण अधिक होता था । 

 

रोटरी वाल्व – ये वाल्व भी प्रायः वर्तमान समय में गाड़ियों में प्रयोग नहीं किये जाते हैं । इन वाल्वों को इनलेट मेनीफोल्ड और एग्जॉस्ट मेंफोल्ड के रास्ते पर लगाया जाता था ।

इनमें एक खोखली रॉड का प्रयोग किया जाता था और ये घूमती थी । जिससे ये घूमते समय combustion चेम्बर को बारी बारी से इनलेट और एग्जॉस्ट वाल्व की तरफ से खोलती थी ।

और अन्य समय combustion चेम्बर के रास्ते खुले रहते थे । इस प्रकार इनलेट का रास्ता खुलते समय फ्यूल सिलेंडर में प्रवेश करता था । और वहीँ एग्जॉस्ट वाल्व के खुलते समय जाली हुई गैसें बाहर निकल जाती थी ।

इन वाल्वों में एक कमी थी कि ये शाफ़्ट के घूमने से घिसावट जल्दी होती थी जिससे गैसें लीक करने लगती थी 

 

पोपेट और मशरूम वाल्व व्यवस्था – वर्तमान समय में इस प्रकार के वाल्वों का प्रयोग इंजनों में अधिक होता है । ये देखने में मशरूम के छतरी के सामान होते हैं ।

इसलिए इन्हें मशरूम के वाल्व के नाम से भी जाना जाता है । इनके हेड पर पुश बने होते हैं । जिसकी अच्छे से फिनिशिंग की जाती है । और इसका मार्जिन पर्याप्त मजबूत बनाया जाता है ।

जिससे कि ये ग्राइंड होने पर भी लीक नहीं करते हैं । इनके हेड प्रायः 450 से 300 पर वाल्व सीट के अनुसार बनाये जाते हैं । साथे ही हैड के साथ एक रॉड लगी होती है । जिसे स्टैम पर वाल्व को स्प्रिंग के साथ लॉक करने के लिए लॉक ग्रूव बना रहता है । 

 

आप सभी जानते हैं के आमतौर पर इंजन में एक सिलेंडर पर दो वाल्व लगाए जाते हैं । एक इनलेट वाल्व और एक एग्जॉस्ट वाल्व एक वाल्व से फ्यूल जलने के लिए सिलेंडर में आता है । और एक वाल्व से जाली हुई गैसें सिलेंडर से बाहर निकलती है । पर कुछ वाहनों में एक वाल्व की जगह दो वाल्वों का प्रयोग किया जाता है । जैसे स्पोर्ट्स कार के इंजनों में एक के स्थान पर दो वाल्वों का प्रयोग किया जाता है । 

wankel engine क्या है ? जाने हिंदी में

वाल्व हैड कितने प्रकार के होते हैं

वाल्व हैड प्रायः तीन प्रकार के होते हैं । जो निम्न प्रकार के होते हैं –

1 . फ्लैट हैड – इस प्रकार के वाल्व हैड का प्रयोग अधिकतर इंजनों में किया जाता है । इनकी हैड समतल आकर की बनायीं जाती है । 

2 . टूलिप हैड – इस प्रकार के वाल्वों का प्रयोग अधिकतर स्पोर्ट्स कार और वायुयानों में देखने को मिलता है । इनकी बनावट हैड नीचे की ओर कुछ गोलाई के आकर की होती है । ये वाल्व गैसों की दक्षता से सील करने का सामर्थ्य रखते हैं ।

3 . स्टैन्डर्ड हैड – इस प्रकार के वाल्वों का हैड ऊपर की ओर कुछ गोलाकार होता है । इनका उपयोग अब कम देखने को मिलता है 

इंजन वाल्व किस धातु से बने होते हैं

आप सभी अच्छी तरह जानते हैं कि cumbustion चेम्बर का ताप बहुत अधिक होता है । जिसका प्रभाव निश्चित तौर पर वाल्वों पर भी पड़ता है । इसलिए इनका प्रयाप्त मजबूत होना आवश्यक है ।

इसलिए इनलेट वाल्व को प्रायः टैन्साइल अलॉय स्टील ये स्टैनलैस स्टील से बनाया जाता है । वहीँ एग्जॉस्ट वाल्व को ज्यादा ताप का सामना करना पड़ता है ।

अतः इनके लिए निकिल स्टील का chrome molybdenum अलॉय का प्रयोग किया जाता है । ये धातु प्रायः जंग ओर ताप की अच्छी अवरोधक मानी जाती है । 

फ्यूल इंजेक्टर क्या है ? हिंदी में fuel injector in hindi

सोडियम कूल्ड वाल्व –

एग्जॉस्ट वाल्व को बहुत अधिक ताप का सामना करना पड़ता है । इसलिए बहुत से इंजनों में सोडियम कूल्ड का उपयोग एग्जॉस्ट वाल्व के रूप में किया जाता है ।

इन वाल्व की स्टैम प्रायः खोखली बनायीं जाती है । इसमें मैटेलिक सोडियम का प्रयोग किया जाता है । कुछ मात्रा में इसमें सोडियम पदार्थ भरा जाता है ।

सोडियम 95.50 C पर पिघल जाता है । प्रायः इंजन के चलमे पर सोडियम पिघल जाता है । और वाल्व के ऊपर नीचे से तरल सोडियम वाल्व की गर्मी को नीचे स्टैम की ओर बढाता रहता है ।

ओर स्टैम इंजन आयल द्वारा ठंडी होती रहती है । इस प्रकार से सोडियम वाल्व बहुत अधिक ताप पर भी बहुत दिनों तक कार्य करता रहता है । पर इसके उपयोग में बहुत ही सतर्कता रखनी पड़ती है । यदि खोखली स्टैम में दरार आ जाये या टूट जाये तो इससे नुक्सान हो सकता है । 

 

वाल्व फिट करने की विधियां
  • T  टाइप वाल्व व्यवस्था 
  • L  टाइप वाल्व व्यवस्था 
  • साइड वाल्व व्यवस्था 
  • F टाइप वाल्व व्यवस्था 
  • ओवर हैड वाल्व 

आपने अभी जाना इंजन वाल्व क्या है ओर ये कैसे कार्य करते हैं । आपको ये पोस्ट कैसे लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें ओर इस पोस्ट को औरों के साथ भी साझा करें और हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

धन्यवाद 

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published.