इंजन में सीसी क्या होता है ? जाने हिंदी में

दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे इंजन सीसी के बारे मैं कि इंजन में सीसी क्या होता है । और इसे कैसे मापा जाता है ।तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से

इंजन में सीसी क्या है ?

आप सभी ने सुना होगा या देखा होगा कि गाड़ियों के इंजन को C.C में मापा जाता है । गाड़ियों के इंजन में लिखा रहता है । जैसे । 110  सीसी का इंजन है या 45O C.C का इंजन है । तो आखिर ये सीसी क्या है । और ऑटोमोबाइल में इसकी क्या उपयोगिता है । तो आपको बता दें कि इंजन की  धारिता को सीसी में मापते हैं ।

इंजन में सीसी का मतलब होता है । क्यूबिक कैपेसिटी या क्यूबिक सेंटीमीटर  आप सभी भली भाँती जानते हैं कि है कि हर एक वस्तु की माप की इकाई होती है ।

जैसे दूरी को मीटर मैं मापते हैं उसी प्रकार माप की कई और इकाईयां होती हैं । ठीक इसी प्रकार इंजन की धारिता को हम सीसी या कहें क्यूबिक सेन्टीमीटर में मापते हैं ये किस प्रकार मापते हैं चलिए इसके बारे में थोड़ा सा विस्तारपूर्वक जानते हैं ।

सीसी इंजन की धारिता होती है । जो इंजन के सिलेंडर का माप होती है । अथार्त इंजन सिलेंडर में एक बार में कितना मिश्रण जलता है । उसे हम सामान्यतौर पर C.C में ज्ञात करते हैं । आपको ये बता दें कि सिलेंडर में कुछ तथ्यों के आधार पर इंजन में सीसी ज्ञात  किया जाता है । जो निम्नलिखित हैं

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स्ट्रोक

इंजन में सीसी यह इंजन में सिलेंडर एक खोखला गोलाकार भाग होता है । और सिलेंडर के इस खोखले भाग में पिस्टन T.D.C ( टॉप डेक सेण्टर ) से (B.D.C) तक ट्रैवल करता है । और पिस्टन के T.D.C से B.D.C के मध्य जो स्थान है । इसे स्ट्रोक कहा जाता है । अब आप ये समझ गए होंगे कि स्ट्रोक क्या है । इसे सिलेंडर की ऊंचाई भी कहा जा सकता है ।

बोर (BORE)

सिलेंडर के अंदर के खोखले गोलाकार भाग जिसे डायमीटर या ( व्यास ) भी कहा जाता है ।को सिलेंडर बोर कहा जाता है ।  सिलेंडर  के आयतन जानने के लिए सिलेंडर के बोर और स्ट्रोक का उपयोग किया जाता है । सिलेंडर के बोर के अनुसार ही पिस्टन को भी डिजायन किया जाता है ।

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सिलेंडर का आयतन कैसे जाने

चलिए जानते हैं कि सिलेंडर और सम्पूर्ण इंजन का आयतन या सीसी कैसे ज्ञात किया जाता है

मान लीजिये कि आपको सिर्फ एक सिलेंडर का आयतन जानना है । तो उसके लिए एक फार्मूला उपयोग किया जाता है ।

πr2h

यहाँ पर πr2 बोर हो दर्शाता है । जो सिलेंडर का गोलाकार अंधरुनी भाग होता है । वहीँ ह दर्शाता है । स्ट्रोक को जो सिलेंडर के T.D.C से B.D.C के मध्य का भाग होता है । और ऊंचाई भी होती है । अब अगर सिलेंडर के बोर (BORE ) और स्ट्रोक (STROKE ) का माप ज्ञात हो तो आसानी से C.C या धारित ज्ञात की जा सकती है । ध्यान रहे हम अभी सिर्फ एक सिलेंडर पर चर्चा कर रहे हैं ।

उदाहरण के तौर पर मान लीजिये कि एक सिलेंडर का स्ट्रोक (STROKE) 10 C.M है और बोर (BORE) 12 C.M का है तो तो

सबसे पहले डायमीटर की की त्रिज्या जान लीजिये जो कि व्यास की आधा होती है

अथार्त व्यास 12 C.M है तो त्रिज्या 6 C.M   तब मान रखने पर

πr2h  =3.14×6×6×12=1356.48 cmएक सिलेंडर का आयतन

पर वाहनों मैं एक से अधिक सिलेंडरों को प्रयोग किया जाता है । अब किसी इंजन का सम्पूर्ण आयतन ज्ञात करना है । तो एक सिलेंडर के आयतन मान से अन्य सभी सिलेंडर से गुना  करना है । तो सम्पूर्ण इंजन का मान C.C निकल जायेगा ।

जैसे कि माना एक इंजन में 4 सिलेंडर हैं । और एक सिलेंडर का आयतन मान मान लीजिये 1356.48 है TAB

सम्पूर्ण इंजन का आयतन = 1356.48×4   = 5425.92 cm3 या 5425.92 C.C कुल

सीसी शब्द का प्रयोग अधिकतर 2 व्हीलर के लिए प्रयोग किया जाता है । वहीँ  बहुत से इंजनों  को लीटर में भी मापा जाता है । ज्यादातर चार पहियों की गाड़ी में कहीं न कहीं देखने को मिलता है  माप लीटर में रहती है । तो इसको लीटर में कैसे मापा जाता है । तो आपको बता दें कि

1000 C.C = 1 लीटर होता है ।

इंजन को लीटर मैं ज्ञात करने के लिए कुल C.C को 1000 से डिवाइड किया जाता है तो माप लीटर में निकल जाती है ।

क्या अधिक C.C का इंजन अच्छा है

अधिकतर स्तिथि में इंजन का C.C जितना ज्यादा होता है । उसमें अधिक फ्यूल को जलाया जा सकता है । और अधिक पावर प्राप्त की जा सकती है । यानी जितने सिलेंडर होंगे उतनी पावर प्राप्त की जा सकती है ।

पर हमेशा ऐसा नहीं होता है । आपको बता दें कि इंजन दो प्रकार की स्तिथि होती है जो निम्न हैं

ओवर स्क्वायर इंजन ( OVER SQUARE ENGINE) इसमें बोर (BORE) का डायमीटर ( व्यास ) अधिक होता है । और स्ट्रोक (STROKE) की माप कम होती है । और पिस्टन का व्यास भी अधिक होता है । इसमें पिस्टन को B.D.C से T.D.C तक जाने के लिए कम ट्रैवलिंग करनी पड़ती है । जब इंजन हाई R.P.M पर होता है । तो पिस्टन कम दूरी तय करने के कारण जल्दी जल्दी ट्रैवल करता है । और जिससे क्रैंक शाफ़्ट भी बहुत तेज घूमती है । इस प्रकार के इंजन का प्रयोग पैट्रोल गाड़ियों में किया जाता है । 

UNDER  SQUARE  ENGINE- इस प्रकार के इंजन में सिलेंडर के बोर (BORE) की माप कम होती है । और स्ट्रोक (STROKE) की माप अधिक होती है । जिससे कि पिस्टन को T.D.C से B.D.C तक जाने के लिए अधिक ट्रैवल करना पड़ता है । जिससे  जब पिस्टन जब गति करता है । तो OVER SQUARE ENGINE के मुकाबले क्रैंक शाफ़्ट धीरे घूमती है । टार्क अधिक होती है । पर गति कम होती है इस प्रकार के इंजन का प्रयोग डीजल गाड़ियों में किया जाता है । 

हमने ये जाना कि इंजन में C.C क्या होता है ।  आपको या पोस्ट कैसी लगी अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें तथा इस पोस्ट को औरों के साथ साझा करें और  हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

धन्यवाद 

 

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