इंजन नौकिंग हिंदी में ? engine knocking in hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में क्या आप जानते हैं कि पैट्रोल इंजन और डीजल  इंजन  नौकिंग क्या है । चलिए जानते हैं इंजन नौकिंग के बारे में ।

इंजन नौकिंग

पैट्रोल इंजन नौकिंग

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पैट्रोल इंजन में फ्यूल को जलाने के लिए स्पार्क प्लग का प्रयोग किया जाता है । जैसे ही सिलेंडर में स्पार्क होता है तो फ्यूल को जलाना स्पार्क प्लग से निकली चिंगारी का कार्य होता है ।

और फ्यूल शुरुआत से लेकर अंत तक एक सामान रूप से जलता है । जिससे पिस्टन को एक पावर थ्रस्ट मिलती है । तथा सिलेंडर में दबाव भी सामान रूप से बढ़ता है । पर कभी कबार एक समस्या होती है

जिसमें फ्यूल का अंतिम भाग स्पार्क से सम्पर्क में आने से पहले ही एक आवाज से साथ जल जाता है । ऐसा होने से पिस्टन के ऊपर एकदम से दबाव पड़ता है । जिससे सिलेंडर में भी दबाव बढ़ता है । जिससे एक विशेष आवाज उत्पन्न होती है । जिसे इंजन नौकिंग या डेटोनेशन  भी कहा जाता है

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नौकिंग या डेटोनेशन होने के कारण

नौकिंग इंजन में होने वाली एक समस्या है । जिसमे इंजन से एक साउंड उत्प्प्न होता है जिससे इंजन में समस्यें उत्पन्न होती हैं । इंजन में नौकिंग होने के कुछ कारण होते हैं । चलिए इनके बारे में थोड़ा चर्चा करते हैं ये कैसे उत्पन्न होते हैं कुछ कारण हैं जो निम्नलिखित हैं

pre ignition  या पूर्व प्रज्वलन

यह जानना आवश्यक है कि आम तौर पर फ्यूल का इग्निशन कम्प्रेशन स्ट्रोक की समाप्ति पर होता है । पर अगर किसी स्तिथि पर इग्नीशन समय से होता है । तो उसे प्री इग्निशन या पूर्व प्रज्वलन कहा जाता है ।

इस स्तिथि के कई कारण हो सकते हैं । जैसे इग्निशन टाइमिंग ख़राब है । या संपीडन अनुपात अधिक है । या cumbustion  चेम्बर में कार्बन जमा हुआ है । अथवा स्पार्क प्लग बहुत गर्म अगर मिश्रण गर्म हो तब भी इंजन नौकिंग होती है ।

और साथ कंबस्शन चेम्बर इस प्रक हो कि स्पार्क होने पर इग्निशन चारों ओर सामान होना चाहिए इसमें कमी से भी नौकिंग होता है । जिससे इस प्रकार की स्तिथि उत्पन्न होती है ।

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नॉकिंग दोष को रोकने के कुछ उपाय

जब कम्प्रेशन स्ट्रोक के समय मिश्रण सिलेंडर में कम्प्रेश होता है । तो उसका ताप बहुत बढ़ जाता है । और स्पार्क के द्वारा उसे जलाया जाता है । पर अगर मिश्रण का ताप बहुत अधिक बढ़ जाए कि ये ऑटो इग्निशन टैंपरेचर तक चला जाए

तो ईंधन तब स्पार्क देने से पहले से ही ये मिश्रण अपने आप जल जाता है । किसी भी फ्यूल का ऑटो इग्निशन टैंपरेचर वह तापमान होता है । जिस पर वह स्वयं ही जलने लगता है । जिससे कि इंजन नॉकिंग की समस्या होती है 

कम्प्रेशन के दौरान ये आवश्यक होता है कि मिश्रण का ऑटो इग्निशन नहीं होना चाहिए  इसके लिए पैट्रोल में ये गुणवत्ता होनी चाहिए कि कम्प्रेशन में अत्यधिक तापमान पर भी ऑटो इग्निशन न हो जिससे कि नौकिंग की समस्या न हो । इसके लिए पैट्रोल में कुछ रासायनिक पदार्थ मिलाये जो है

ऑक्टेन नंबर

यह पैट्रोल का एक विशेष गुण होता है जो अत्यधिक टैंपरेचर पर भी मिश्रण को ऑटो इग्निशन  से रोकता है । और नियंत्रित इग्निशन करके नौकिंग को रोकता है । ऑक्टेन नंबर या फिर ऑक्टेन रेटिंग कहलाता है ।

या सामान्य शब्दों मैं कहें तो पैट्रोल की एंटीनौक गुणों के दर्शाने की स्तिथि ऑक्टेन नंबर या फिर ऑक्टेन रेटिंग कहलाती है । इसके लिए इसमें कुछ रासायनिक मिलाये जाता है ।

ये पदार्थ टेट्राईथाइल लैड ( T  E L ) होता है । इसके कारण इग्निशन झटके से नहीं होता है । इसको 0.07% तक मिलाया जाता है । वर्तमान समय लैड रहित पैट्रोल का प्रयोग किया जाता है ।

पैट्रोल के ऑक्टेन नंबर के लिए नार्मल हैप्टेन (C7H16) एंटी नौक प्रॉपर्टी बहुत कम होती है ।  और आइसो ऑक्टेन (C8H18) एंटी नौक प्रॉपर्टी बहुत अच्छी होती है ।को मिलाकर विभिन्न मिश्रण बनाये जाते हैं ।

ऑक्टेन नंबर पैट्रोल में आइसो ऑक्टेन का प्रतिशत होता है । पैट्रोल का ऑक्टेन नम्बर जितना अधिक होगा वो उतना अधिक नौक अवरोधक होगा

यदि किसी पैट्रोल का ऑक्टेन नम्बर 93 है । तो इसका अर्थ इसमें 93% आइसो ऑक्टेन और 7 % नार्मल हैप्टेन है ।

किसी बुएल की ऑक्टेन रेटिंग 100 से अधिक हो सकती है ।

और C.N.G की ऑक्टेन रेटिंग लगभग 125 है । अथार्त इसमें आइसो ऑक्टेन से 25% एंटी नौक गुण हैं

वर्तमान में 93 से 94 ऑक्टेन नम्बर रेगुलर ग्रेड पैट्रोल का है

प्रीमियम ग्रेड पैट्रोल का ऑक्टेन नम्बर 90 से 100 होता है ।

वहीँ सुपर प्रीमियम पैट्रोल का ऑक्टेन नम्बर 101 से 102 है

भारत में प्रयोग किये जाने वाले सामान्य पैट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग 91 होती है । इसे अतरिक्त

स्पीड 93 पैट्रोल की रेटिंग 93 है और स्पीड 97 की ऑक्टेन रेटिंग 97 होती है । तथा पावर 99 की ऑक्टेन रेटिंग 99 होती है ।

डीजल इंजन नॉकिंग क्या है ?

डीजल इंजन में सक्शन स्ट्रोक के दौरान केवल साफ़ हवा प्रवेश करती है । फिर उसे कम्प्रेश किया जाता है । जिससे हवा का दाब बहुत अधिक बढ़ जाता है । तथा उस पर डीजल का स्प्रे किया जाता है ।

गर्म हवा के संपर्क मैं आते ही डीजल जल जाता है । डीजल को इंजेक्टर के माध्यम से सिलेंडर में इंजेक्ट किया जाता है । और जब इग्निशन होता है । तो स्प्रे और इग्निशन के के बीच के समय को इग्निशन लैक कहा जाता है । जिससे इंजन नॉकिंग होतीं है । और इंजन से ंसुकिंग वौइस् निकलती है

डीजल इंजन में इग्निशन लैक जितना कम होता है । इंजन उतना अच्छा होता है । और इग्निशन लैक जितना अधिक होता है । तो समस्याएं रहती है । फ्यूल के इंजेक्ट और इग्निशन के समय बीच में डिप्रेश बहुत ज्यादा होता है ।

जिससे कि ज्यादा फ्यूल इंजन में प्रवेश करता है । जब फ्यूल जलता है । तो दाब और तापमान ज्यादा बढ़ जाता है । और कुछ हद तक फ्यूल liquid फॉम में इंजन में प्रवेश करता  है । इसे इंजन लैकिंग कहते हैं । जिससे कि इंजन नॉकिंग होती है ।

डीजल इंजन नॉकिंग को कैसे रोकें

डीजल नॉकिंग को रोकने के लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं । जैसे

  • combustion चेम्बर के ताप को बढाकर
  • एयर टर्बुलेन्स को बढाकर
  • कम्प्रेशन अनुपात को बढाकर
  • इंजेक्टर प्रेशर को बढाकर
  • या हवा का इनलेट प्रेशर को बढाकर

इसके अतरिक्त डीजल की गुणवत्ता को बढ़ाकर भी नॉकिंग को रोका जा सकता है । जिसे सीटेन नंबर कहते हैं । चलिए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं

सीटेन नंबर

डीजल फ्यूल की गुणवत्ता को सीटेन नंबर से दर्शाया जाता है । सामान्य शब्दों में नार्मल हेक्साडेकेन (C16H34) को सीटेन नंबर कहा जाता है । किसे भी फ्यूल में सीटेन नंबर का जितना प्रतिशत होता है । वही उसका सीटेन नंबर कहलाता है ।

मान लीजिये किसी डीजल का सीटेन नंबर 55 है हो इसका अर्थ है कि इसमें 55% सीटेन और बाकी मिथाइल नेप्थलीन है

डीजल का सीटेन नंबर अधिक होने से उसका इग्निशन डिले कम होता है । डीजल आसानी से जलता है ।

सीटेन नंबर की वैल्यू सामान्यतः 35 से 60 के बीच में रहती है । भारत में प्रयोग होने वाले डीजल का सीटेन नंबर लगभग 51 होता है ।

अब आप ये सोच रहे होंगे कि अगर डीजल का सीटेन नंबर अधिक होता है । तो डीजल में अधिकतर सीटेन क्यों नहीं रखा जाता है । जिसका कारण है । कि अगर डीजल का सीटेन नंबर आवश्यकता से अधिक होगा तो

डीजल हवा के साथ मिक्स होने से पूर्व ही जल जायेगा और डीजल की कुछ मात्रा बिना जले ही रह जाएगी जिससे इंजन में अत्यधिक धुआं निकलेगा और इंजन नॉकिंग होगी

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धन्यवाद 

 

 

 

 

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