इंजन गवर्नर क्या है ? और कितने प्रकार के होते हैं

इंजन गवर्नर

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे इंजन गवर्नर क्या है । कितने प्रकार के होते हैं और कैसे कार्य करते हैं । तो चलिए जानते हैं इंजन गवर्नर के बारे में आखिर गवर्नर है क्या ऒर ये कैसे कार्य करता है 

इंजन गवर्नर क्या है

सामान्य शब्दों में कहा जाये तो इंजन गवर्नर एक ऐसा मेकेनिकल डिवाइस है । जिसका उपयोग इंजन में किया जाता है । और इसका मुख्य कार्य होता है । गति को बनाये रखना जब भी गाडी पर भार पड़ता है । तो भार पड़ने के कारण गाडी की गति पर प्रभाव पड़ता है । तो उस परिवर्तन के नियंत्रित करने के लिए ऑटोमोबाइल इंजन में गवर्नर का उपयोग किया जाता है

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गवर्नर गति को कैसे नियंत्रित करता है

जब भी इंजन पर भार पड़ता है तो उस स्तिथि में इंजन में ईंधन के सप्लाई कम होती है । उस स्तिथि में गवर्नर फ्यूल की सप्लाई को बढ़ा देता है । जिससे कि इंजन को सप्लाई बढ़ जाती है । और गाडी सामान्य गति से आगे बढ़ती है । वहीँ इसके विपरीत जब गाडी में भार कम होता है । तो गाडी की गति कुछ हद तक बढ़ जाती है । तो उस स्तिथि में भी गवर्नर ईंधन की सप्लाई को नियंत्रित करता है । और गाडी सामान्य तरीके से गति करती है । तो अब आप जान गए होंगे कि गाडी की गति में जो परिवर्तन होता है । तो उसको गवर्नर नियंत्रित करता है । 

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इंजन गवर्नर कितने प्रकार के होते हैं

इंजन गवर्नर निम्न प्रकार के होते हैं –

सेन्ट्रीफ्यूगल गवर्नर –

इसमें सेन्ट्रीफ्यूगल वॉल वेट या फ्लाई वेट का प्रयोग किया जाता है । और ये वेट फ्यूल इंजेक्शन पम्प की कैम शाफ़्ट पर लगे होते हैं । इन वेटों को एक स्प्रिंग द्वारा लगाया जाता है । प्रायः इंजन के चलने पर फ्यूल इंजेक्शन पम्प की कैम शाफ़्ट उसी के अनुसार इन वेटों को घुमाती है । जिनका  सम्बन्ध पम्प की कंट्रोल रॉड से भी रहता है । 

कार्य प्रणाली

जब भी वॉल वेट घूमते हैं तो सेन्ट्रीफ्यूगल फोर्स के कारण ये बाहर की ऒर फैलने भी लगते है । जब इंजन धीमी गति से चलता है । तो वेट भी तेज घूमकर अधिक बाहर फैलते हैं । इसलिए इनसे सम्बंधित कंट्रोल रॉड भी वेट के फैलने के अनुसार अधिक या कम बाहर की ऒर होती रहती है । ऒर फ्यूल इंजेक्शन पम्प में कंट्रोल रॉड आगे पीछे होकर प्लंजर को कंट्रोल स्लीव के द्वारा घुमाकर डीजल सप्लाई में डीजल की मात्रा को कम या अधिक करके इंजन की अधिकतम तथा न्यूनतम चाल को नियंत्रित रखती है । दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है । गवर्नर डीजल सप्लाई में डीजल की मात्रा को इंजन की आवश्कयता के अनुरूप सप्लाई नियंत्रित करता है 

वॉट गवर्नर –

इसकी खोज जेम्स वॉट नमक वैज्ञानिक ने की थी ऒर उन्होंने इसका नाम नाम पर रखा इसलिए इसे वॉट गवर्नर के नाम से जाना जाता है । यह गवर्नर एक सरल प्रकार का अपकेंद्रीय गति अधिनियन्त्रिक है । ऒर लोक गति अधिनियन्त्रक कहलाता है । ये सेन्ट्रीफ्यूगल गवर्नर का ही रूप है । ये प्रायः तीन प्रकार के होते हैं –

  • सरल वॉट गवर्नर 
  • ऑफ सेट भुजा वॉट गवर्नर 
  • क्रॉस भुजा वॉट गवर्नर 
न्यूमेटिक गवर्नर –

इनमे एक डायफ्राम का प्रयोग किया जाता है । जो इस प्रणाली का आधार होता है । ये इनलेट मेनीफोल्ड में सक्शन स्ट्रोक के समय उत्पन्न डिप्रेशन से प्रभावित होता है । इसकी को ईकाइयां होती है । डायफ्राम यूनिट ऒर इनलेट मेनीफोल्ड यूनिट । इनलेट मेनीफोल्ड में बटर फ्लाई लगायी जाती है । जिसका कनेक्शन एक्सीलरेटर पैडल से होता है । 

कार्य प्रणाली

इनलेट मेनीफोल्ड में एक वेन्चुरी लगी होती है । ऒर इसका सम्बन्ध डायफ्राम यूनिट से होता है । जब इंजन चलता है । तो इनलेट मेनीफोल्ड में सक्शन स्ट्रोक के समय चूस का प्रभाव पड़ता है । इससे वेन्चुरी में वैक्यूम पैदा होता है । जो डायफ्राम पर अपना प्रभाव डालता है । यह डायफ्राम जो एक स्प्रिंग के साथ लगा होता है । कंट्रोल रॉड से भी सम्बंधित रहता है । इस कारण जब एक्सीलरेटर पैडल द्वारा बटर फ्लाई को खोला जाता है । तो उसी के अनुरूप वैक्यूम से उत्पन्न चूस द्वारा डायफ्राम बाहर की ऒर स्प्रिंग के दबाव के विपरीत खिंच जाता है । इससे डायफ्राम से सम्बंधित कंट्रोल रॉड भी खिंचती है । ऒर ऒर कंट्रोल स्लीव को घुमाकर प्लंजर द्वारा डीजल सप्लाई में डीजल की मात्रा बढ़ा देती है । इसी प्रकार जब एक्सीलरेटर कम दबता है । तो चूस का कम प्रभाव डायफ्राम पर पड़ता है । जिससे कंट्रोल रॉड भी कम खिंचकर डीजल सप्लाई की मात्रा कम कर देती है । 

पोर्टर गवर्नर –

पोर्टर गवर्नर वॉट गवर्नर का ही एक सुधारा हुआ रूप है । इसमें स्लीव के ऊपर एक अचल भार लगा दिया जाता है । अचल भार स्पिण्डल की अक्ष पर ऊपर नीचे गति कर सकता है । इस अचल भार के नीचे की ऒर क्रिया करने के कारण उन केंद्रों के घूमने की गति में वृद्धि होती है । जिसके कारण वे एक निश्चित ऊंचाई तक ही ऊपर उठ सकती है 

हाइड्रोलिक गवर्नर –

इसमें इंजन की चाल नियंत्रित रखने के लिए सप्लाई के समय कंट्रोल रॉड पर हाइड्रोलिक दबाव का प्रयोग किया जाता है । इस गवर्नर में चार मुख्य भाग होते हैं । कंट्रोल प्लंजर , हाइड्रोलिक पम्प , प्लंजर स्प्रिंग , संकुचित मुख 

इंजन चलने की दशा में उसकी चाल के अनुरूप हाइड्रोलिक पम्प चलता है । तथा वह तेल का उसी अनुपात में दबाव कंट्रोल प्लंजर पर डालता है । कंट्रोल प्लंजर जो कि एक स्प्रिंग  के साथ लगा रहता है । फ्यूल पम्प की कंट्रोल रॉड से भी सम्बंधित रहता है । इसलिए जब कंट्रोल प्लंजर पर तेल का दबाव पड़ता है । तो कंट्रोल रॉड की स्तिथि बदलती है । इससे फ्यूल सप्लाई में फ्यूल की मात्रा पर भी अंतर पड़ता है । जिससे इंजन को डीजल की सप्लाई अधिकतम तथा न्यूनतम चाल पर नियंत्रित रहती है 

प्रोइल गवर्नर –

इस गवर्नर में उड़न गेंदों के बिंदु E पर कड़ियाँ लगाकर उनके ऊपरी सिरे से लगा दिया जाता है । यह गति अधिनियन्त्रक पोर्टर गति अधिनियन्त्रक में सामान गति के लिए पोर्टर गति अधिनियन्त्रक की तुलना में उड़न गेंदों का भार कम रखा जाता है 

हार्टनैल गवर्नर –

ये एक प्रकार का स्प्रिंग भारित गति अधिनियन्त्रक है । इसमें दो बेल एन्ड क्रैंक लीवर पर लगे होते हैं । एक फ्रेम गति अधिनियन्त्रक की स्पिण्डल से बद्ध किया होने के कारण स्पिण्डल के साथ साथ घूमता है । लीवर्स से ऊर्ध्वाधर भुजा के सिरे पर उड़न गेंद तथा क्षैतिज भुजा से सिरों पर रोलर लगे होते हैं । एक सम्पीड़ित कुन्डलीदार स्प्रिंग के द्वारा रोलर पर एक बल नीचे की ऒर क्रिया करता है । स्प्रिंग पर लगने वाले संपीडन बल को गति अधिनियन्त्रक के ऊपर लगे नट को कसकर नियंत्रित किया जा सकता है । 

अभी आपने जाना कि इंजन गवर्नर क्या है । आपको ये पोस्ट कैसी लगी । अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में भेजें । ऒर कृपया इसे औरों के साथ साझा करें तथा हमें FACEBOOK और INSTAGRAM पर जरूर फॉलो करें 

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