इंजन के भाग कौन कौन से हैं ? जाने हिंदी में

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक और नयी पोस्ट में आज हम जानेंगे की इंजन में कौन से मुख्य भाग होते हैं और उनका क्या क्या कार्य होता है । तो चलिए जानते हैं इंजन के सभी भागों के बारे में

इंजन के मुख्य भाग

इस पोस्ट में हम इन्टर्नल cumbustion इंजन के  बारे में बात करेंगे डीजल और पैट्रोल इंजन के सभी पार्ट्स के बारे में जानेंगे एक इंजन एक यूनिट के रूप में कार्य करता है । तथा पावर जेनेरेट करता  है और  बहुत सारे भागों से मिलकर बना होता है । हर एक पार्ट का अपना कार्य होता है ।  जानते हैं इन पार्ट्स के बारे में जो निम्नलिखित हैं इंजन के भाग 

सिलेंडर हैड

सिलेंडर हैड इंजन का सबसे ऊपरी भाग होता है । और कास्ट आयरन के बनाये जाते हैं। पर कुछ इंजनों में ये एल्युमीनियम स्टील के भी बने होते हैं जिससे इंजन का भार कुछ हद तक कम होता है  । सिलेंडर हैड ही सिलेंडर को ऊपर से कवर करके बंद करते है । हैड में ही cumbustion चेम्बर बनाया जाता है । जिसमें फ्यूल जलता है । 

जिन सिलेंडरों में वाल्व सिलेंडर हेड पर लगाए जाते हैं । दिखने में थोड़ा ऊँचे होते है । जिसका कारण है । वाल्व गाइड इसी पर फिट की जाती है । सिलेंडर हेड को बहुत  सूक्ष्म तरीके से और सावधानी से बनाया जाता है ।

क्यूंकि इसमें बहुत सारे वाल्व के आलावा cumbustion चेम्बर के बाहर पानी पहुँचाने के लिए सूक्ष्म मार्ग भी बनाने होते हैं । जो पानी पहुंचकर इंजन को ठंडा रखने में मदद करते हैं ।इंजन इंजन के भाग इंजन के भाग इंजन  इंजन इंजन इंजन इंजन 

सिलेंडर हेड की सतह बहुत समतल होती है । जो की नट बोल्ट के जरिये सिलेंडर ब्लॉक से जुड़ा रहता है । और जहाँ से जुड़ा रहता है उस जगह ध्यान रखना पड़ता है । की फ्यूल या कूलिंग वाटर का लीकेज न हो ।

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सिलैंडर ब्लॉक

यह इंजन के भाग का मध्य भाग होता है । और इसी में बेलनाकार खोखले सिलैंडर बने होते हैं एक या एक से अधिक सिलेंडर । इसी ऊपर अभी आपने जाना कि सिलेंडर हैड लगा होता है । और इनके बीच में गैस्केट फिट की जाती है ।

जो कि लीकेज को रोकती है । और सिलेंडर ब्लॉक नीचे आयल सम्प से जुड़ा रहता है । और बंद होता है । यह ग्रे कास्ट आयरन से बनाया जाता है जिसमें कुछ अन्य तत्व जैसे आयरन 95% , कार्बन 2.2% सिलिकॉन 1.2% फास्फोरस 0.86% , सल्फर 0.13% मेगनीज 0.64% को मिलाया जाता है

जिससे ये ताप विरोधी हो जाता है । जिससे कि घिसावट भी कम से कम हो । इसी बेलनाकार खोखले सिलैंडर में ही पिस्टन अपने स्ट्रोक पूरे करता है । इसके चारों और वाटर कूलिंग के लिए वाटर जैकेट और आयल  गेलरी  भी बनाये जाते हैं तथा जिन इंजनों में साइड वाल्व लगाए जाते हैं । उनमें वाल्वों के लिए वाल्व शीट और वाल्व गाइड के लिए जगह बनानी होती है ।

आयल सम्प

ये इंजन का सबसे निचला भाग होता है । और सिलैंडर ब्लॉक को धुल मिटटी से कवर करने के लिए ये नीचे से ब्लॉक रहता है । लुब्रिकेशन आयल इसी में भरा रहता है । इसे आयल चेम्बर के नाम से भी जाना जाता है ।

ये एल्युमीनियम एलाय की चादर को प्रेस करके बनाया जाता है । इसमें एक ड्रेन प्लग बना होता है । जिससे आयल को समय अनुसार निकला जा सकता है । आयल सम्प से ही इंजन के चलते भागों को लुब्रिकेशन मिलता है । 

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पिस्टन

पिस्टन कनेक्टिंग रॉड और के जरिये गजन पिन से जुड़ा रहता है । और सिलेंडर में T.D.C से B.D.C तक चलता रहता है । पिस्टन से ही इंजन में सक्शन , कम्प्रेशन , पावर , एग्जॉस्ट चारों स्ट्रोक पूरे होते हैं ।

जब इंजन में पावर स्ट्रोक होता है । उस समय पिस्टन को बहुत बड़ा झटका लगता है । इसलिए पिस्टन को ऐसा बनाया जाता है । जो इस झटके को सहन कर सके । इसमें कुछ गुण होने चाहिए जैसे –

  • पिस्टन भार में हल्का होना चाहिए और साथ ही मुलायम भी होना चलिए
  • पिस्टन को मुलायम और लचीला टूटने का भय न हो पिस्टन गर्म होकर अधिक आयतन का नहीं होना चाहिए 
  • इसकी घिसावट काम होनी चाहिए और चलते समय आवाज नहीं होनी चाहिए i
  • इसमें जंग नहीं लगना चाहिए और उसमे का अच्छा सुचालक होना चाहिए 
  • और अधिक महंगा न हो 

पिस्टन ज्यादातर एल्युमीनियम एलाय के बने होते हैं । वहीँ कुछ इंजनों में कास्ट आयरन और सेमि स्टील के भी बने होते है । 

गजन पिन

पिस्टन को कनेक्टिंग रॉड से जोड़ने के लिए गजन पिन का प्रयोग किया जाता है । ये स्टील के खोखले पाइप से बनायीं जाती है । और पिस्टन बॉस के आर पार फिट की जाती है । और इनके बीच में कनेक्टिंग रॉड का स्माइल एण्ड फिट किया जाता है । गजन पिन तीन प्रकार की होती हैं 

1 . फुल फ्लोटिंग टाइप 

2 . फिक्स पिन 

3 . सेमी फ्लोटिंग टाइप

 

कनेक्टिंग रॉड

ये पिस्टन और क्रैंक शाफ़्ट से जुडी होती है । और पिस्टन को T.D.C से B.D.C की चाल से क्रैंक शाफ़्ट को घुमाती है । कनेक्टिंग रॉड कुछ तिरछी होती है । ये बहुत मजबूत होती है ।

क्यूंकि पिस्टन का बहुत बड़ा झटका इस पे लगता है । ये कास्ट आयरन और एल्युमीनियम एलाय से बनी होती है । इसका एक एण्ड बड़ा और एक एण्ड छोटा होता है ।

छोटे सिरे पर स्माल एण्ड बियरिंग और बड़े सिरे पर बिग एण्ड बियरिंग कहा जाता है छोटा सिरा गजन पिन की सहायता से पिस्टन से जुड़ा होता है ।

और बड़ा सिरा दो भागों से बना होता है । जिन्हें कनेक्टिंग रॉड बोल्ट के माध्यम से क्रैंक शाफ़्ट के क्रैंक पिन पर फिट किया जाता है ।

 

क्रैंक शाफ़्ट

ये किसी भी इंजन का बहुत महत्वपूर्ण भाग है । ये पिस्टन से कनेक्टिंग रॉड के माध्यम जुडी होती है । और जब पिस्टन T.D.C से B.D.C तक चलता है । तो क्रैंक शाफ़्ट भी घूमती है ।

और घूमती हुई चाल को रोटरी मोशन में कन्वर्ट करती है । ये इंजन का सबसे तेज घूमने वाला भाग होता है । ये बनावट में टेढ़ी मेढ़ी होती है । और । इस पर प्रायः काफी लोड होता है ।

तो इसको काफी मजबूत बनायीं जाती है । इसे स्टील फोर्जिंग द्वारा ड्रॉप फ़ोर्ज़ स्टील से बनाया जाता है । इसे बहुत सी धातुओं से मिलकर बनाया जाता है । जो निम्न हैं 

  • ताम्बा 1.60 से 2..2
  • कार्बन 1.40 से 1.65
  • मैंगनीज 0.60 से 0.81
  • गंधक 0.59
  • फास्फोरस 0.9
  • क्रोमियम 0.46 से 0.49
  • सिलिकॉन 0.86 से 1.11 

क्रैंक शाफ़्ट पर दो प्रकार की बियरिंग के लिए साथ होती है बिग एण्ड बियरिंग और में एण्ड बियरिंग जिस जगह बिग एण्ड बियरिंग फिट रहती है । उसे क्रैंक पिन तथा  जिस जगह में एण्ड बियरिंग फिट रहती है । उसे क्रैंक जनरल कहता हैं ।

 

इंजन के कुछ अन्य भाग
  • कैम शाफ़्ट 
  • टाइमिंग गियर 
  • फ्लाई व्हील 
  • इंजन वाल्व 
  • ओवर हेड वाल्व वयस्था 
  • वाल्व स्प्रिंग 
  • वाल्व गाइड 
  • वाल्व टैपिट 
  • पुश रॉड
  • इनलेट मेनीफोल्ड
  • एग्जॉस्ट मेनीफोल्ड 

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